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Maharashtra: तीसरे दिन भी जारी रहा जरांगे का अनिश्चितकालीन अनशन, सरकार पर लगाया ध्यान भटकाने का आरोप

Mon, 12 Feb 2024 02:14 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

एक साल से भी कम समय में यह चौथी बार है जब वह मराठा समुदाय को ओबीसी (अन्य पिछड़ी जाति) समूह के तहत शामिल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। जरांगे ने पहले मुंबई तक एक विशाल मार्च का नेतृत्व किया था।
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मनोज जरांगे - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार पर मराठा आरक्षण के मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। साथ ही दावा किया कि वह मराठा आरक्षण के लिए अलग कोटा पर विचार कर रही है।

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बता दें कि एक साल से भी कम समय में यह चौथी बार है जब वह मराठा समुदाय को ओबीसी (अन्य पिछड़ी जाति) समूह के तहत शामिल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। जरांगे ने पहले मुंबई तक एक विशाल मार्च का नेतृत्व किया था, जो 26 जनवरी को इसकी सीमाओं पर समाप्त हुआ था। इस बार, वह जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में हड़ताल कर रहे हैं। 

2023 में सीएम ने दिया था आश्वासन
पिछले साल दिसंबर में, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आश्वासन दिया था कि पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए राज्य विधानमंडल का एक विशेष सत्र फरवरी में आयोजित किया जाएगा। हालांकि, महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने मराठा आरक्षण देने का विरोध किया है।
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अपनी मांग दोहराई
जरांगे ने सोमवार को एक मसौदा अधिसूचना के तत्काल कार्यान्वयन की अपनी मांग दोहराई। अधिसूचना में कहा गया था कि 'ऋषि सोयर' या मराठा के रक्त संबंधी जिसके पास भी यह दर्शाने का रिकॉर्ड होगा कि वह कुनबी समुदाय से है, उसे भी कुनबी के रूप में मान्यता दी जाएगी। यानी कि एक ऐसा कृषि समुदाय जिसे ओबीसी कोटा प्राप्त है। 

मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप
मराठाओं को आरक्षण देने के लिए विशेष सत्र बुलाने की महाराष्ट्र सरकार की मंशा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने सरकार पर समुदाय के लिए आरक्षण के मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। जरांगे ने कहा कि वह मराठाओं को देने के लिए एक अलग कोटा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जोर देकर कहा कि विशेष सत्र को कुनबी मराठों के रक्त संबंधियों पर मसौदा अधिसूचना को एक कानून में बदलने और कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिनके दस्तावेजों को सत्यापित किया गया है।

57 लाख को जाति प्रमाण पत्र जारी
इससे पहले, जरांगे ने कहा था कि सरकार को कुनबी रिकॉर्ड रखने वाले 57 लाख लोगों को (ओबीसी) जाति प्रमाण पत्र जारी करना चाहिए। कार्यकर्ता रविवार को अनशन जारी रखने के अपने फैसले पर कायम रहे। फिलहाल, उन्होंने यह भी मांग की है कि राज्यभर में मराठा समुदाय के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले तुरंत वापस लिए जाएं। 

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