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'बाबुल' के लिए द्वार खुले: अभी खत्म नहीं हुई है सुप्रियो की सियासी पारी, आज बैठक के बाद लेंगे फैसला

Mon, 02 Aug 2021 12:20 AM IST
सुरेंद्र जोशी आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बंगाल के नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने अचानक राजनीति से संन्यास का एलान कर सबको चौंका दिया है। पर जानकारों का कहना है कि उनकी सियासी पारी पर विराम लगा है, यह अभी खत्म नहीं हुई है।
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Babul Supriyo
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विस्तार
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पूर्व केंद्रीय मंत्री व आसनसोल से भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो ने राजनीति को अलविदा क्या कहा, पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राज्य की राजनीत पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि बाबुल सुप्रियो का यह पॉलिटिकल ब्रेक जरूर हो सकता है, लेकिन सियासी संन्यास नहीं। कयास लगाए जा रहे हैं कि बहुत जल्द ही बाबुल सुप्रियो बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी से अपना नाता जोड़ सकते हैं। चर्चा है कि बीते कुछ दिनों में उनकी मुलाकात ममता बनर्जी के कुछ खास सियासी सिपहसालारों से भी हुई है।

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भाजपा नेतृत्व से जताई नाराजगी
पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने अचानक राजनैतिक संन्यास लेने की घोषणा कर एक तरीके से भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व से नाराजगी जताई है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस नाराजगी के पीछे और अचानक राजनैतिक संन्यास लिए जाने की घोषणा की कई वजह हैं। सूत्रों का कहना है पहली बात तो पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बाबुल सुप्रीयो को जब टिकट देखकर मैदान में उतारा गया तो यह फैसला ही बाबुल के गले नहीं उतरा था।

बाबुल सुप्रियो को मनाने में जुटा भाजपा नेतृत्व, नड्डा के साथ हुई बैठक
राजनीति से संन्यास की घोषणा के बाद भाजपा नेतृत्व पूर्व मंत्री और सांसद बाबुल सुप्रियो को मनाने में जुट गया है। इस क्रम में रविवार को पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की सुप्रियो के साथ एक घंटे की अहम बैठक हुई। बैठक में नड्डा ने सुप्रियो को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। सुप्रियो की सोमवार शाम पार्टी नेतृत्व के साथ एक और बैठक होगी। इसके बाद वह संन्यास के संबंध में अंतिम फैसला करेंगे।
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पार्टी सूत्रों ने बताया कि सुप्रियो की पश्चिम बंगाल में पार्टी संगठन से चल रही तकरार इसका अहम कारण है। उनकी राज्य पार्टी अध्यक्ष दिलीप घोष के साथ विधानसभा चुनाव से पहले ही अनबन चल रही है। इसी बीच जब सुप्रियो को हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा, तब उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने का मन बनाया।

उपचुनाव नहीं चाहती भाजपा
पश्चिम बंगाल में भाजपा के राज्यसभा सांसद मुकुल रॉय पहले ही बगावत कर तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर चुके हैं। अब अगर सुप्रियो लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देते हैं तो पार्टी को राज्य में उपचुनाव का सामना करना पड़ेगा। उपचुनाव में अगर पार्टी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से पराजित हुई तो इसका असर कार्यकर्ताओं और राज्य इकाई के नेताओं के मनोबल पर पड़ेगा। वैसे भी शनिवार को उत्तर 24 परगना में हुई अहम बैठक से तीन विधायकों ने दूरी बना ली। पार्टी को आशंका है कि ये विधायक तृणमूल कांग्रेस में जा सकते हैं।

भाजपा की अंदरूनी राजनीति के शिकार हुए?

सूत्रों का कहना है इसके लिए बाबुल सुप्रियो ने भाजपा आलाकमान से बात भी की थी। सूत्रों के मुताबिक पार्टी की अंदरूनी राजनीति का उन्हें शिकार होना पड़ा। पश्चिम बंगाल के कुछ नेताओं को इस बात का मलाल रहता था कि बाबुल सुप्रियो को केंद्र में उनके हिसाब से कुछ ज्यादा ही बड़ा कद और पद मिला हुआ है। यही वजह है कि एक धड़े ने बाबुल सुप्रियो को विधानसभा के मैदान में उतारने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था, ताकि विधानसभा चुनाव के फैसलों के आधार पर उनकी लोकप्रियता का आकलन कर लिया जाए।

तृणमूल के कई नेताओं से कर चुके मुलाकात
सूत्रों का कहना है कि बीते कुछ दिनों में बाबुल सुप्रियो की मुलाकात तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं से हो चुकी है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक सूचना न तृणमूल कांग्रेस की ओर से है और ना ही बाबुल सुप्रियो की ओर से कभी साझा की गई। लेकिन सूत्र बताते हैं कि ममता बनर्जी के बहुत खास राजनीतिक सिपहसालारों के साथ उनकी दो दौर की वार्ता हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि बाबुल सुप्रियो ने अपने फेसबुक अकाउंट पर इस बात का जिक्र किया है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी में नहीं जा रहे हैं, लेकिन ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है। जिस तरीके से पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के बहुत बड़े बड़े विकेट अपने पाले में लेकर के गिराए थे, अब ठीक उसी तर्ज पर तृणमूल कांग्रेस का पार्टी नेतृत्व भाजपा को बंगाल में कमजोर करने की रणनीति बना रहा है। सूत्र बताते हैं बाबुल सुप्रियो का राजनीतिक संन्यास इसी कड़ी का एक हिस्सा है। हालांकि बाबुल सुप्रियो की ओर से इस बात की अधिकारी घोषणा हो चुकी है कि वह किसी पार्टी में नहीं जाएंगे, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजनीति में ऐसे वायदे और ऐसे कथन का कोई महत्व नहीं होता है। इसलिए पूरी संभावना है कि बाबुल सुप्रियो बहुत जल्द पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सक्रिय होंगे।



 
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मंत्री पद से हटाने के फैसले से थे नाखुश

सुप्रियो के अचानक राजनीति से संन्यास की घोषणा से एक बात तो स्पष्ट है कि वह भारतीय जनता पार्टी के उस फैसले से खुश नहीं है, जिसके तहत उनको केंद्रीय मंत्री पद से हटा दिया गया। बाबुल सुप्रियो ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बात का स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अपने लोकसभा क्षेत्र में जाते रहेंगे। वहां के कामकाज को भी देखते रहेंगे। उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में अपनी लोकसभा सीट आसनसोल में कराए गए कामों का भी जिक्र किया है। बाबुल सुप्रियो ने इस बात को स्पष्ट कहा है कि अपने लोकसभा क्षेत्र में कई 100 करोड़ का विकास का काम कराया है जिसको देखने वह जाते ही रहेंगे। इसके अलावा उन्होंने ट्रांसपोर्टेशन के लिए किए जाने वाले विकास कार्यों को भी देखने की बात सोशल मीडिया के माध्यम से क्षेत्र की जनता से कही है।

अन्य दल भी बाबुल पर दांव लगाने को तैयार
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बाबुल सुप्रियो जैसा पश्चिम बंगाल का चर्चित चेहरा बगैर पॉलिटिकल पार्टी के रहे ऐसा दूसरी राजनीतिक पार्टियां होने नहीं देंगी। सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस ही नहीं बल्कि और भी कई पार्टियां बाबुल सुप्रियो पर दांव लगाने के लिए पश्चिम बंगाल में तैयार हैं।
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