सूत्रों का कहना है इसके लिए बाबुल सुप्रियो ने भाजपा आलाकमान से बात भी की थी। सूत्रों के मुताबिक पार्टी की अंदरूनी राजनीति का उन्हें शिकार होना पड़ा। पश्चिम बंगाल के कुछ नेताओं को इस बात का मलाल रहता था कि बाबुल सुप्रियो को केंद्र में उनके हिसाब से कुछ ज्यादा ही बड़ा कद और पद मिला हुआ है। यही वजह है कि एक धड़े ने बाबुल सुप्रियो को विधानसभा के मैदान में उतारने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था, ताकि विधानसभा चुनाव के फैसलों के आधार पर उनकी लोकप्रियता का आकलन कर लिया जाए।
तृणमूल के कई नेताओं से कर चुके मुलाकात
सूत्रों का कहना है कि बीते कुछ दिनों में बाबुल सुप्रियो की मुलाकात तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं से हो चुकी है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक सूचना न तृणमूल कांग्रेस की ओर से है और ना ही बाबुल सुप्रियो की ओर से कभी साझा की गई। लेकिन सूत्र बताते हैं कि ममता बनर्जी के बहुत खास राजनीतिक सिपहसालारों के साथ उनकी दो दौर की वार्ता हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि बाबुल सुप्रियो ने अपने फेसबुक अकाउंट पर इस बात का जिक्र किया है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी में नहीं जा रहे हैं, लेकिन ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है। जिस तरीके से पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के बहुत बड़े बड़े विकेट अपने पाले में लेकर के गिराए थे, अब ठीक उसी तर्ज पर तृणमूल कांग्रेस का पार्टी नेतृत्व भाजपा को बंगाल में कमजोर करने की रणनीति बना रहा है। सूत्र बताते हैं बाबुल सुप्रियो का राजनीतिक संन्यास इसी कड़ी का एक हिस्सा है। हालांकि बाबुल सुप्रियो की ओर से इस बात की अधिकारी घोषणा हो चुकी है कि वह किसी पार्टी में नहीं जाएंगे, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजनीति में ऐसे वायदे और ऐसे कथन का कोई महत्व नहीं होता है। इसलिए पूरी संभावना है कि बाबुल सुप्रियो बहुत जल्द पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सक्रिय होंगे।
सुप्रियो के अचानक राजनीति से संन्यास की घोषणा से एक बात तो स्पष्ट है कि वह भारतीय जनता पार्टी के उस फैसले से खुश नहीं है, जिसके तहत उनको केंद्रीय मंत्री पद से हटा दिया गया। बाबुल सुप्रियो ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बात का स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अपने लोकसभा क्षेत्र में जाते रहेंगे। वहां के कामकाज को भी देखते रहेंगे। उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में अपनी लोकसभा सीट आसनसोल में कराए गए कामों का भी जिक्र किया है। बाबुल सुप्रियो ने इस बात को स्पष्ट कहा है कि अपने लोकसभा क्षेत्र में कई 100 करोड़ का विकास का काम कराया है जिसको देखने वह जाते ही रहेंगे। इसके अलावा उन्होंने ट्रांसपोर्टेशन के लिए किए जाने वाले विकास कार्यों को भी देखने की बात सोशल मीडिया के माध्यम से क्षेत्र की जनता से कही है।
अन्य दल भी बाबुल पर दांव लगाने को तैयार
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बाबुल सुप्रियो जैसा पश्चिम बंगाल का चर्चित चेहरा बगैर पॉलिटिकल पार्टी के रहे ऐसा दूसरी राजनीतिक पार्टियां होने नहीं देंगी। सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस ही नहीं बल्कि और भी कई पार्टियां बाबुल सुप्रियो पर दांव लगाने के लिए पश्चिम बंगाल में तैयार हैं।