मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जारांगे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए है। मंगलवार को उन्होंने कहा कि वह भूख हड़ताल वापस लेने के लिए तैयार है। लेकिन वह तब तक धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे, जब तक राज्य सरकार कुनवी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं कर देती है।
महाराष्ट्र सरकार को अल्टीमेटम
भूख हड़ताल पर बैठे जारांगे ने कहा कि वह महाराष्ट्र सरकार को एक महीने का समय दे रहे हैं। ताकि, राज्य द्वारा नियुक्त समिति मराठा आरक्षण पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर सकें। मंगलवार को राज्य के मंत्री संदीपन भुमरे और जालना से शिवसेना नेता अर्जुन खोतकर ने जारांगे से मुलाकात की और सर्वदलीय बैठक में पारित प्रस्तावों को साझा किया। हिंदुत्व नेता संभाजी भिडे ने भी मुलाकात की और उनसे अनशन वापस लेने का अनुरोध किया। हालांकि, जारांगे ने कहा कि वह अपना विरोध जारी रखेंगे क्योंकि मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की उनकी मांग पर राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
सभा को संबोधित करते हुए जारांगे ने कहा
मैं दो कदम पीछे चल रहा हूं ताकि मेरे समुदाय की बदनामी बंद हो, मैं अपना अनशन वापस लेने को तैयार हूं। लेकिन मैं यह जगह खाली नहीं करूंगा। हमने राज्य सरकार को 40 साल दिए हैं, लेकिन उसने कभी भी हमारी समस्याओं का समाधान नहीं किया। अगर राज्य सरकार अपने ही वादे को लागू नहीं करती है, तो वह औंधे मुंह गिर जाएगी।
मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर सरकार में हलचल
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीते सोमवार को जारांगे के नेतृत्व में चल रहे मराठा आरक्षण आंदोलन के चलते मुंबई में एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भाग लेने वाले सभी दलों ने एक प्रस्ताव पारित कर जारांगे से अपना अनशन वापस लेने का अनुरोध किया। इसी दौरान मुख्यमंत्री शिंदे ने दर्ज पुलिस मामलों को भी वापस लेने की घोषणा की।
क्या है मामला?
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर 40 वर्षीय मनोज जारांगे महाराष्ट्र के अंतरवाली सरती गांव में 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
पांच सदस्यीय पैनल का गठन
राज्य सरकार ने कुनबी (अब ओबीसी का हिस्सा) कहे जाने वाले मराठा समुदाय के सदस्यों को जाति प्रमाण पत्र देने की मांग को लेकर न्यायाधीश संदीप शिंदे (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पैनल का गठन किया है। आपको बता दें कि 1960 से पहले मराठा समाज को कुनबी समाज का प्रमाणपत्र दिया जाता था। लेकिन संयुक्त महाराष्ट्र का गठन होने के बाद यह प्रमाणपत्र मिलना बंद हो गया है।