पिछले महीने राज्य सरकार द्वारा जारी मसौदा अधिसूचना के अनुसार, यदि किसी मराठा व्यक्ति के पास यह दिखाने के लिए सबूत है कि वह कुनबी जाति से है, तो उस व्यक्ति के रक्त संबंधियों को भी कुनबी के रूप में मान्यता दी जाएगी। कुनबी ओबीसी श्रेणी में आते हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ मिलता है।
मराठा आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने एक बार फिर सरकार को चेतावनी दी है। जरांगे ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को कुनबी मराठों के खून के रिश्तों वाले सदस्यों को लेकर मसौदा अधिसूचना को दो दिनों के भीतर लागू करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो समुदाय के लोग 24 फरवरी से राज्य भर में सड़क नाकाबंदी करेंगे। जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में मराठा समुदाय के सदस्यों की एक बैठक में बोलते हुए जरांगे ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हिंसा का सहारा नहीं लेने पर जोर दिया। जरांगे यहां 10 फरवरी से भूख हड़ताल पर हैं।
विज्ञापन
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने दावा किया कि मराठा समुदाय को 10 फीसदी आरक्षण देने वाला विधेयक कानूनी समीक्षा में टिक नहीं पाएगा। जरांगे ने अपनी मांग दोहराई कि कुनबी मराठों के 'रक्त संबंधियों' पर महाराष्ट्र सरकार की मसौदा अधिसूचना को एक कानून में तब्दील किया जाए। जरांगे ने कहा कि सरकार ने मराठों के रिश्तेदारों को आरक्षण देने के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की थी, लेकिन उन्होंने इसे लागू नहीं किया। यहां तक कि विधानसभा के विशेष सत्र में भी इस पर कोई चर्चा नहीं हुई।
मसौदा अधिसूचना में क्या?
पिछले महीने राज्य सरकार द्वारा जारी मसौदा अधिसूचना के अनुसार, यदि किसी मराठा व्यक्ति के पास यह दिखाने के लिए सबूत है कि वह कुनबी जाति से है, तो उस व्यक्ति के रक्त संबंधियों को भी कुनबी के रूप में मान्यता दी जाएगी। कुनबी ओबीसी श्रेणी में आते हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ मिलता है।
विज्ञापन
विशेष सत्र के दौरान सर्वसम्मति से पास हुआ बिल
इससे पहले महाराष्ट्र विधानमंडल ने मंगलवार को विशेष सत्र के दौरान सर्वसम्मति से एक अलग श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठों के लिए 10 फीसदी आरक्षण मुहैया करने वाला एक विधेयक पारित किया। हालांकि, जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत समुदाय के लिए आरक्षण की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में बताया कि कुनबी मराठों के रक्त संबंधियों को प्रमाण पत्र देने के लिए पिछले महीने जारी मसौदा अधिसूचना की समीक्षा चल रही है, क्योंकि छह लाख आपत्तियां भी प्राप्त हुई हैं।