मणिपुर में विधानसभा चुनाव की तिथि का एलान हो गया है। यहां की 60 सीटों पर दो चरणों में मतदान होंगे। पहले चरण की वोटिंग 27 फरवरी को होगी। इसके लिए एक फरवरी को अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। नामांकन की आखिरी तारीख आठ फरवरी रखी गई है। नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी नौ फरवरी तक होगी और नाम वापसी के लिए 11 फरवरी तक मौका दिया जाएगा।
वहीं, दूसरे फेज की वोटिंग तीन मार्च को होगी। इसके लिए चार फरवरी को अधिसूचना जारी होगी और 11 फरवरी तक उम्मीदवार नामांकन कर सकेंगे। 14 फरवरी को नामांकन की जांच होगी, जबकि 16 फरवरी तक उम्मीदवारों को नाम वापस लेने का मौका दिया गया है। पिछली बार मणिपुर में चार मार्च और आठ मार्च को चुनाव हुए थे।
मुख्यमंत्री पद के चेहरे
1. एन बीरेन सिंह: बीरेन सिंह राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। पांच साल सरकार चलाने वाले बीरेन सिंह फिर से मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं।
2. थोंगम बिस्वजीत सिंह: आरएसएस के करीबी बिस्वजीत सिंह का 2017 में भाजपा सरकार के गठन में अहम रोल रहा है। भाजपा अगर मणिपुर में असम मॉडल लागू करती है तो चुनाव जीत के बाद बिस्वजीत नए मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
3. इकराम इबोबी सिंह: 15 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे इकरार इबोबी सिंह इस बरा भी कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। बढ़ती उम्र 73 साल के इबोबी सिंह की दावेदारी कमजोर कर सकती है।
चुनाव प्रचार के चेहरे
मणिपुर विधानसभा चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
1. नरेंद्र मोदी: हर राज्य की तरह मणिपुर में भी भाजपा के चुनाव प्रचार का चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे।
2. राहुल गांधी: सोनिया गांधी की खराब सेहत के कारण पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ही मणिपुर में भी पार्टी के चुनाव प्रचार का चेहरा होंगे।
3. ममता बनर्जी: बंगाल में जीत के बाद ममता बनर्जी नार्थ ईस्ट में भी पार्टी का आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। इस चुनाव के दौरान वो टीएमसी के चुनाव प्रचार का चेहरा होंगी।
4. कोर्नाड संगमा: मेघायल के मुख्यमंत्री कोर्नाड संगमा की पार्टी भी मणिपुर में 40 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। संगमा मणिपुर में कुछ चुनावी रैलियां भी कर चुके हैं।
चुनाव के बड़े मुद्दे
1. अफस्पा (AFSPA) : अन्य उत्तर पूर्वी राज्यों की तरह यहां भी अफस्पा चुनावी मुद्दा है। विपक्ष ही नहीं सरकार में भाजपा की सहयोगी एपीएफ और एनपीपी ने भी इस कानून को वापस लेने की मांग की है। मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र का दावा है कि अगर 2022 में कांग्रेस वापस सत्ता में आती है, तो पूरे मणिपुर से अफस्पा को पूरी तरह से हटाने का फैसला किया जाएगा।
2. बेरोजगारी: राज्य में बेरोजगरी भी अहम चुनावी मुद्दा है। विपक्ष का आरोप है कि 2017 में भाजपा ने हर घर को एक नौकरी का अवसर देने का वादा किया था, लेकिन अब भी राज्य के लोगों की औसत आय देश के औसत की आधी है।