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Congress: 'PM मोदी वैचारिक आधार पर कर्मचारियों को विभाजित करना चाहते हैं', RSS पर बैन हटाए जाने पर खरगे

Mon, 22 Jul 2024 02:33 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि 1947 में आज ही के दिन भारत ने अपना राष्ट्रीय ध्वज अपनाया था। आरएसएस ने तिरंगे का विरोध किया था और सरदार पटेल ने उन्हें इसके खिलाफ चेतावनी दी थी।
 
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पीएम मोदी और मल्लिकार्जुन खरगे। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गतिविधियों में सरकारी कर्मचारियों के भाग लेने पर लगे 58 साल पुराने प्रतिबंध को हटा लिया है। अब सरकारी कर्मचारी आरएसएस की गतिविधियों में शामिल हो सकेंगे। इस फैसले को लेकर कांग्रेस और भाजपा में जुबानी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैचारिक आधार पर कर्मचारियों का राजनीतिकरण करना चाहते हैं। 

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'आज ही के दिन देश ने अपना राष्ट्रीय ध्वज अपनाया था'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि 1947 में आज ही के दिन भारत ने अपना राष्ट्रीय ध्वज अपनाया था। आरएसएस ने तिरंगे का विरोध किया था और सरदार पटेल ने उन्हें इसके खिलाफ चेतावनी दी थी।

पीएम ने पिछले कई सालों में संघ का इस्तेमाल किया
उन्होंने आगे कहा, 'चार फरवरी 1948 को गांधी जी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया था। पीएम मोदी ने 58 साल बाद सरकारी कर्मचारियों पर आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने पर 1966 में लगा प्रतिबंध हटा दिया है। हम जानते हैं कि पिछले 10 वर्षों में भाजपा ने सभी संवैधानिक और स्वायत्त संस्थानों पर संस्थागत रूप से कब्जा करने के लिए संघ का उपयोग किया है।'
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खरगे ने कहा, 'पीएम मोदी सरकारी कर्मचारियों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में शामिल होने पर लगा प्रतिबंध हटा कर सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों को विचारधारा के आधार पर विभाजित करना चाहते हैं। यह सरकारी कार्यालयों में लोक सेवकों के निष्पक्षता और संविधान के सर्वोच्चता के भाव के लिए चुनौती होगा।'

चुनाव जीत कर संविधान नहीं बदल पा रहे तो...
उन्होंने कहा कि सरकार संभवतः ऐसे कदम इसलिए उठा रही है क्योंकि जनता ने उसके संविधान में फेर-बदल करने की कुत्सित मंशा को चुनाव में परास्त कर दिया। चुनाव जीत कर संविधान नहीं बदल पा रहे तो अब पिछले दरवाजे सरकारी दफ्तरों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कब्जा कर संविधान से छेड़छाड़ करेंगे।'

कांग्रेस नेता ने कहा, 'यह आरएसएस द्वारा सरदार पटेल को दी गई उस माफीनामा व आश्वासन का भी उल्लंघन है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को संविधान के अनुरूप, बिना किसी राजनीतिक एजेंडे के एक सामाजिक संस्था के रूप में काम करने का वादा किया था। विपक्ष को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिये आगे भी संघर्ष करते रहना होगा।'

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, केंद्र सरकार ने 1966, 1970 और 1980 में तत्कालीन सरकारों ने सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की गतिविधियों में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगाया था। अब सरकार ने इन आदेशों में संशोधन किया है, जिससे अब सरकारी कर्मचारी आरएसएस के कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने पर कर्मचारियों को कड़ी सजा देने तक का प्रावधान लागू किया गया था। सेवानिवृत होने के बाद पेंशन लाभ इत्यादि को ध्यान में रखते हुए सरकारी कर्मचारी आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने से बचते थे।

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