2008 के मालेगांव ब्लास्ट में अंतिम बहस वारदात के लगभग 16 साल बाद आज गुरुवार को शुरू हुई। बता दें कि 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच मौजूद शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के सामने रात 9:35 बजे बम विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई और 101 लोग घायल हुए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, विस्फोट एक मोटरसाइकिल (जो कथित तौर पर भोपाल की पूर्व सांसद प्रज्ञा ठाकुर की है) में लगे एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण से हुआ था।
मालेगांव ब्लास्ट में कुल सात आरोपी
इस मामले में पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सात आरोपी मुकदमे का सामना कर रहे हैं। वहीं एक आरोपी समीर कुलकर्णी के खिलाफ मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल प्रसाद पुरोहित के अलावा मामले में अन्य आरोपी मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी और सुधाकर चतुर्वेदी हैं। सभी पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत मुकदमा चल रहा है।
ब्लास्ट को लेकर NIA की अंतिम दलील
मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने विशेष सरकारी वकील अविनाश रसल और अनुश्री रसल की ओर से पेश हुए अपने बयान में कहा, वारदात के दौरान रमजान का पवित्र महीना था और नवरात्रि उत्सव शुरू होने वाला था। साजिशकर्ताओं ने लोगों को आतंकित करने, जान-माल की हानि करने के इरादे से विस्फोट किए थे। यह समुदाय के लिए आवश्यक आपूर्ति और सेवाओं को बाधित करने, सांप्रदायिक दरार पैदा करने और राज्य की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने के इरादे से किया गया था।
'सभी आरोपियों ने मिलकर रची थी साजिश'
बता दें कि इस मामले की शुरुआत में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने जांच की थी, उसके बाद इसे केंद्रीय एजेंसी एनआईए को सौंप दिया गया। अंतिम दलील में अभियोजन पक्ष ने एटीएस जांच का हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया था कि आरोपी पुरोहित कश्मीर में अपनी पोस्टिंग पूरी करने के बाद अपने साथ आरडीएक्स लाया था और इसे अपने घर में रखा था। एटीएस जांच में आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी के नासिक मौजूद घर में आरडीएक्स के निशान मिले थे, जहां बम बनाया गया था और प्रज्ञा ठाकुर ने पूरी जानकारी के साथ बम विस्फोट करने के लिए अपनी मोटरसाइकिल मुहैया कराई थी।
एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद साल 2016 में आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें उसने प्रज्ञा ठाकुर और तीन अन्य आरोपियों- श्याम साहू, प्रवीण तकलकी और शिवनारायण कलसांगरा को क्लीन चिट देते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है और उन्हें मामले से बरी करने की मांग की थी। हालांकि, एनआईए अदालत ने केवल साहू, कलसांगरा और तकलकी को बरी किया और फैसला सुनाया कि प्रज्ञा ठाकुर को मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। उस समय, विशेष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ सख्त महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत आरोप हटा दिए थे।
आरोपियों पर इन धाराओं में चल रहा है मुकदमा
इस मामले में विशेष अदालत ने 30 अक्टूबर, 2018 को यूएपीए और आईपीसी के तहत सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। आरोपियों पर यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य करना) और 18 (आतंकवादी कृत्य करने की साजिश करना) और आईपीसी की धारा 120 (बी) (आपराधिक साजिश), 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 324 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 153 (ए) (दो धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत मुकदमा चल रहा है।
आरोप तय होने के बाद, 2018 में पहले गवाह की जांच के साथ मामले की सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही की रिकॉर्डिंग पिछले साल सितंबर में पूरी हुई थी। फिलहाल मामले में अंतिम बहस शुक्रवार को जारी रहेगी।