मुंबई-गोवा महामार्ग का निर्माण वर्षों पहले शुरू हुआ जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। अब नागपुर से गोवा को जोड़ने वाले प्रस्तावित शक्तिपीठ महामार्ग का निर्माण कार्य भी अधर में लटक सकता है। इसके खिलाफ कोल्हापुर के किसानों और स्थानीय लोगों की तरफ से भारी विरोध शुरू हो गया है। इसको देखते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह हाईवे आम जनता पर थोपा नहीं जाएगा। इस महामार्ग के निर्माण से नागपुर से गोवा के बीच 21 घंटे की यात्रा 11 घंटे में पूरी हो सकती है लेकिन अब यह योजना खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है।
नागपुर से गोवा के बीच 802 किलोमीटर लंबा शक्तिपीठ महामार्ग प्रस्तावित है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण के भी निर्देश दिए गए हैं। नागपुर-गोवा हाईवे बनने से राज्य के प्रमुख शक्तिपीठ माहूर, तुलजापुर और कोल्हापुर, औंढा-नागनाथ व परली-वैजनाथ समेत अन्य धार्मिक स्थल इस महामार्ग से जुड़ जाएंगे। यह महामार्ग विदर्भ, मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के 12 जिलों वर्धा, यवतमाल, हिंगोली, नांदेड़, परभणी, बीड, लातूर, धाराशिव, सोलापुर, सांगली, कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग जिले से होकर गुजरेगा।
राज्य सरकार की तरफ से जमीन अधिग्रहण के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन इस महामार्ग के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की जानी है जहां फसलें उगाई जाती हैं। ऐसे में किसान इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। महामार्ग की वजह से कोल्हापुर जिले के करीब 59 गांव प्रभावित होंगे। कुछ दिनों पहले महाविकास आघाड़ी के नेताओं ने कोल्हापुर में शक्तिपीठ महामार्ग के विरोध में आंदोलन किया था।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के नवनिर्वाचित सांसद व छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज साहू छत्रपति महाराज ने भी हिस्सा लिया था। किसानों और विपक्षी नेताओं के विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ट्वीट कर सरकार का पक्ष रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शक्तिपीठ महामार्ग आम जनता पर थोपा नहीं जाएगा। रूट में बदलाव किया जा सकता है? इस बारे में विचार किया जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास नागपुर-गोवा शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना को रद्द करने की मांग की जा रही है।