देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश ने 1975 में तानाशाही देखी, जब पूरे विपक्ष को दो वर्षों के लिए जेल में डाल दिया गया था। जिन लोगों के खून में तानाशाही है, वे ही हमारे ऊपर इसे लेकर आरोप लगा रहे हैं।
महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के एक बयान से सियासी विवाद खड़ा हो गया है। वडेट्टीवार ने एटीएस के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे को लेकर एक बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि हेमंत करकरे की मौत आतंकवादी अजमल कसाब की गोली से नहीं, बल्कि आरएसएस के वफादार पुलिस अधिकारी की गोली से हुई थी। उनके इस बयान पर महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया है। फडणवीस ने वडेट्टीवार पर पाकिस्तान की बोली बोलने का आरोप लगाया है। वडेट्टीवार ने इस मामले की पैरवी करने वाले अधिवक्ता और उत्तर-मध्य मुंबई से भाजपा प्रत्याशी उज्जवल निकम को देशद्रोही करार दिया।
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वडेट्टीवार के बयान पर फडणवीस का पलटवार
डिप्टी सीएम ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भी घेरा। उन्होंने वडेट्टीवार के बयान पर उद्धव ठाकरे की चुप्पी पर सवाल उठाया। फडणवीस ने कहा, "हेमंत करकरे को अजमल कसाब ने नहीं मारा था, ये बोलकर वडेट्टीवार पाकिस्तान की बोली बोल रहे हैं। पूरा देश उज्ज्वल निकम के साथ है, लेकिन कांग्रेस सिर्फ आतंकवाद के साथ है।"
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि देश तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। इस पर फडणवीस ने कहा कि देश ने 1975 में तानाशाही देखी, जब पूरे विपक्ष को दो वर्षों के लिए जेल में डाल दिया गया था। जिन लोगों के खून में तानाशाही है, वे ही हमारे ऊपर इसे लेकर आरोप लगा रहे हैं।
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उद्धव ठाकरे को भी घेरा
फडणवीस ने बताया कि मोदी सरकार के कल्याणकारी योजनाओं से सबसे ज्यादा लाभ अल्पसंख्यकों और मुसलमानों को हुआ है। उन्होंने आगे कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों को लाभ देने में विश्वास रखते हैं। कांग्रेस विभाजनकारी राजनीति कर रही है। इसके कारण देश को पहले भी विभाजन का सामना करना पड़ा था।" फडणवीस ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करने की योजना बनाई थी।
अजित पवार बारामती में अपनी मां आशा पवार को मतदान केंद्र पर लेकर गए थे। वहां अजित ने कहा था कि उन्हें उनकी मां का आशीर्वाद प्राप्त है। इसे लेकर सवाल किए जाने पर फडणवीस ने कहा कि जब ऐसी छवि बनाई गई कि अजित पवार को परिवार के बाकी लोगों ने दरकिनार कर दिया, तो ऐसे में मां से बड़ा कोई आशीर्वाद नहीं है।