राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक नए महाराष्ट्र सदन के निर्माण के ठेके में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल और उनके परिजनों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। यह बात एक विशेष अदालत ने अपने फैसले में कही। इससे पहले भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो (एसीबी) के लिए विशेष अदालत ने वरिष्ठ एनसीपी नेता छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज व भतीजे समीर समेत पांच अन्य को महाराष्ट्र सदन के निर्माण में कथित घोटाले से संबंधित मामले में बरी कर दिया था। इस फैसले की विस्तृत जानकारी शुक्रवार को सामने आई।
इस पूरे मामले की जांच करने वाली एसीबी ने आरोप लगाया था कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महाराष्ट्र सरकार के नए अतिथि गृह के निर्माण का ठेका केएस चमनकार एंटरप्राइजेज को मिला था। एसीबी का आरोप था कि इस फर्म ने भुजबल और उनके परिजनों को रिश्वत मिली थी। ब्यूरो के अनुसार चमनकार एंटरप्राइजेज ने नीशे इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य कंपनियों को पैसा भेजा था। एसीबी ने आरोप लगाया था कि चमनकार एंटरप्राइजेज ने जिन कंपनियों को पैसा भेजा गया उनके निदेशक पंकज भुजबल और समीर भुजबल हैं।
विशेष न्यायाधीश एचएस साथभाई ने इस मामले में अपने फैसले में कहा कि सबूत बताते हैं कि चमनकार एंटरप्राइजेज को निर्माण का ठेका देने में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई और फर्म की ओर से छगन भुजबल को कोई अवैध रिश्वत या लाभ नहीं मिला। बता दें कि चमनकार एंटरप्राइजेज को महाराष्ट्र सदन के निर्माण का ठेका राज्य सरकार की ओर से साल 2005-2006 में दिया गया था। जब यह ठेका दिया गया था तब एनसीपी नेता छगन भुजबल राज्य सरकार में पीडब्लयूडी (लोक निर्माण विभाग) मंत्री के पद पर थे।
एसीबी ने आरोप लगाया था कि ठेकेदार ने सरकारी मानदंड के खिलाफ निर्माण करके 80 फीसदी (करीब 190 करोड़ रुपये) लाभ कमाया। जबकि लाभ के मार्जिन की अनुमति केवल 20 फीसदी की थी। एसीबी के अनुसार भुजबल परिवार को उस फर्म से रिश्वत के रूप में 13.5 करोड़ रुपये मिले थे। लेकिन विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि चमनकार एंटरप्राइजेज की ओर से छगन भुजबल या उनके परिवार को देने के उद्देश्य से 13.5 करोड़ रुपये किसी और कंपनी को भेजे।