मद्रास हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (केवीपीवाई) योग्यता परीक्षा को स्थगित करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव बनर्जी और न्यायमूर्ति एम दुरईस्वामी की पीठ के समक्ष दायर याचिका में कहा गया था कि सात नवंबर को होने वाली परीक्षा केवल अंग्रेजी और हिंदी में आयोजित की जा रही है। केवीपीवाई विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य छात्रों को विज्ञान व शोध में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
परीक्षा सिर्फ अंग्रेजी व हिंदी में आयोजित करने के खिलाफ दायर की गई थी जनहित याचिका
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से अदालत के सामाने विभिन्न भारतीय भाषाओं में उत्तरों का आकलन करने के लिए पर्याप्त परीक्षकों की कमी और तकनीकी व वैज्ञानिक शब्दों और शब्दावली का आकलन करने में सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का हवाला दिया, लेकिन पीठ ने केंद्र की दलील को खारिज करते कहा कि जापान या जर्मनी जैसे देशों के साथ ऐसा नहीं है। इन देशों में शिक्षा मातृभाषा में ही दी जाती है, लेकिन उन्होंने तकनीकी विषयों में तेजी से प्रगति की है।
पीठ ने केंद्र से विभिन्न भारतीय भाषाओं में परीक्षा आयोजित करने के लिए पर्याप्त जनशक्ति हासिल करने के संबंध में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगते हुए कहा कि किसी भी उम्मीदवार को हिंदी या अंग्रेजी नहीं जानने के चलते अयोग्य नहीं ठहराया जाना चाहिए। वैसे भी परीक्षा का उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को पहचानना है। केंद्र को दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए चेन्नई पीठ को स्थानांतरित कर दी।