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केंद्र : सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- ईडब्ल्यूएस की आरक्षण पात्रता निर्धारित करने के लिए आठ लाख की वार्षिक आय सीमा तर्कसंगत

Wed, 27 Oct 2021 04:56 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी की पात्रता आय सीमा का निर्धारण गंभीर विचार-विमर्श का परिणाम है जो ओबीसी के संदर्भ में मानदंड निर्धारित करने के लिए पहले ही हो चुका है।
 
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सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) की आरक्षण पात्रता निर्धारित करने के लिए आठ लाख रुपये की वार्षिक आय के मानदंड को अपनाया जाना तर्कसंगत है।

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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी की पात्रता आय सीमा का निर्धारण गंभीर विचार-विमर्श का परिणाम है जो ओबीसी के संदर्भ में मानदंड निर्धारित करने के लिए पहले ही हो चुका है।

मंत्रालय ने यह हलफनामा मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 50 फीसदी अखिल भारतीय कोटा सीटों में ओबीसी के लिए 27 फीसदी और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने की केंद्र की अधिसूचना को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उठे मसले पर दाखिल किया है।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाए गए इस सवाल पर कि क्या केंद्र सरकार ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के निर्धारण के लिए मानदंड पर पहुंचने से पहले इस बारे में कोई अभ्यास किया था,  केंद्र ने कहा है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के निर्धारण के लिए मानदंड सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के भीतर और सभी संबंधित हितधारकों से विचार- विमर्श के बाद तैयार किया गया है।

सिंहो आयोग के निष्कर्षों के आधार पर तय किया मानदंड
हलफनामे में कहा गया है कि ईबीसी की पहचान के संदर्भ में 17 जनवरी, 2019 के कार्यालय ज्ञापन के अस्तित्व में आने से पहले ही सरकार ने वर्ष 2005 में मेजर जनरल सिंहो आयोग का गठन किया था।

जुलाई, 2010 में आयोग कई निष्कर्षों पर पहुंचा था, जिसमें एक निष्कर्ष ये भी था कि ओबीसी में क्रीमी लेयर की पहचान करने के लिए तय मानदंड सामान्य श्रेणी में ईबीसी परिवारों की पहचान के लिए एक मानदंड के रूप में अच्छी तरह काम कर सकते हैं। वैकल्पिक रूप से आयोग ने सिफारिश की कि सामान्य श्रेणी के बीपीएल परिवार जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक पारिवारिक आय करयोग्य सीमा से कम है उसे  ईबीसी के रूप में पहचाना जा सकता है।

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