दरअसल 27 अक्तूबर 2020 को राजधानी दिल्ली से सटे फरीदाबाद में दो युवकों तौसीफ और रेहान ने निकिता तोमर नाम की लड़की का अपहरण करने की कोशिश की थी। जब लड़की ने इसका विरोध किया तो आरोपी तौसीफ ने उसे गोली मार दी और निकिता की मौके पर मौत हो गई।
इस घटना के बाद से कई राज्यों में लव जिहाद को लेकर बहस शुरू हो गई और विरोध प्रदर्शन होने लगे। कुछ दिन बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित कई भाजपाई राज्यों में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने को लेकर बातचीत तेज हो गई। बता दें कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश ने इस संबंध में मसौदा भी तैयार कर लिया है।
लव जिहाद शब्द साल 2009 से सुनने को मिला है, इससे पहले रोमियो जिहाद शब्द ज्यादा सुना जाता था। जो कि बाद में लव जिहाद बन गया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि लव जिहाद शब्द पहली बार 2009 में इस्तेमाल किया गया था। रिटायर्ड जस्टिस केटी शंकरन ने माना था कि केरल के कुछ हिस्सों में जबरन धर्म परिवर्तन के मामले मिले हैं।
तब उन्होंने केरल सरकार से इसके खिलाफ कानूनी प्रावधान लाने की बात कही थी। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रेम के नाम पर, किसी को धोखे या उसकी मर्जी के बिना धर्म बदलने पर मजबूर नहीं किया जा सकता है।
भारत में दो अलग-अलग धर्म के लोग विशेष विवाह अधिनियम 1954, हिंदू धर्म के लोग हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और मुस्लिम धर्मावलंबी मुस्लिम परंपराओं के मुताबिक शादी कर सकते हैं। हालांकि गलत नाम बताने, धर्म या आयु छिपाने, वैवाहिक स्थिति छिपाने जैसी गलतियों पर भारतीय कानूनों के तहत सजा का प्रावधान है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 366 के तहत अपहरण के मामलों में 10 साल की सजा हो सकती है। वैवाहिक मामलों में सामान्य तौर पर लड़की ही कानूनी कार्रवाई के लिए अधिकृत है लेकिन सीआरपीसी की धारा 198 के तहत परिजन भी कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।
मध्यप्रदेश में लव जिहाद को लेकर जो कानून का प्रस्ताव सामने रखा गया है उसमें पांच साल की सजा का प्रावधान है।