विशेष ड्रोन के विकास से जुड़े सूत्रों ने बताया कि रोटरी विंग वाले इन ड्रोन में 40 किलो वजन साथ ले जाने की क्षमता होगी। इनमें मिसाइल व सेंसर लगाए जा सकेंगे। इन्हें सेना की जरूरतों को समझते हुए विकसित किया जा रहा है।
चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दुश्मन की गतिविधियों की कड़ी निगरानी के लिए सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. (एचएएल) विशेष ड्रोन पर काम कर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से युक्त यह आधुनिक मल्टी-रोल ड्रोन लंबे समय तक और चीन से लगती सीमा सहित ऊंचे इलाकों पर उड़ने में सक्षम होंगे।
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इनके विकास से जुड़े सूत्रों ने बताया कि रोटरी विंग वाले इन ड्रोन में 40 किलो वजन साथ ले जाने की क्षमता होगी। इनमें मिसाइल व सेंसर लगाए जा सकेंगे। इन्हें सेना की जरूरतों को समझते हुए विकसित किया जा रहा है। एलएसी के पहाड़ी व ऊंचे क्षेत्रों का खास ध्यान में रखा जा रहा है। इन्हें मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) की श्रेणी में रखा जाता है।
इस्राइली ड्रोन हेरन के उत्पादन पर भी नजर
इस्राइली ड्रोन हेरन टीपी के उत्पादन की संभावना एचएएल तलाश रहा है। इनके उत्पादक से समन्वय किया जा रहा है ताकि भारतीय सेना की जरूरतों के अनुसार इन्हें तैयार कर सकें और वैश्विक सप्लाई भी कर पाएं। यह ड्रोन 35 हजार फीट की मध्यम ऊंचाई पर 45 घंटे तक उड़ने में सक्षम है। इन्हें ऑटोमेटिक टैक्सी-टेक ऑफ और लैंडिंग (एटीओएल) और उपग्रह संचार प्रणाली से युक्त रखा जाता है।