लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई अब महासंग्राम में बदलती दिख रही है। हर तरफ नेताओं के वादे, दलों की दोस्ती, विरोधियों के वार और एक दूसरे को चित करने की रणनीतियां नजर आ रही हैं। ऐसे में जनता क्या चाहती है? जनता के मुद्दे क्या हैं, उसके दिल में क्या है? राजनेताओं के वादों और दावों के पीछे का सच क्या है? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब के लिए अमर उजाला डॉट कॉम का चुनावी रथ पहुंच रहा है लोगों के बीच। मुजफ्फरनगर में हमने जानने की कोशिश की कि क्या हैं यहां के चुनावी मुद्दे और अपेक्षाएं।
केमिस्ट्री विभाग के हेड रह चुके बुजुर्ग प्रोफेसर ने बताया कि नौकरियों की कमी है। न सिर्फ युवाओं के लिए नई नौकरियां नहीं हैं बल्कि पुराने लोगों की नौकरियां भी जा रही हैं।
एक अन्य बुजुर्ग ने कहा कि सांसद संजीव बाल्यान को मंत्रीपद से बीच में हटाकर मोदी सरकार ने हतोत्साहित करने का काम किया। गन्ने के दामों में भी बढ़ोतरी की भी उन्होंने वकालत की।
भाजपा के प्रतिनिधि कपिल अग्रवाल ने इन मुद्दों का जवाब देते हुए कहा कि सांसद संजीव बाल्यान चुनौतियों के बावजूद बेहतर काम कर रहे हैं। गन्ने के सवाल पर उन्होंने जल्द हालात सुधरने की बात कही।
स्थानीय लोगों ने कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है। शिक्षा का स्तर कम है। छात्रों को नोएडा, फरीदाबाद, गुड़गांव जैसे शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। महिलाओं ने कहा कि वो सरकारी योजनाओं से संतुष्ट हैं। इस मौके पर एक महिला ने पुलवामा की घटना का भी जिक्र किया और कहा कि देश के 125 करोड़ लोग एक साथ हैं।
महासंग्राम का अगला पड़ाव होगा- सहारनपुर।