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लखनऊ सीट: भाजपा का गढ़ और अटल की सियासी कर्मभूमि, 28 सालों से 'भगवा' का परचम

Fri, 03 May 2019 12:21 PM IST
ललित फुलारा चुनाव डेस्क, अमर उजाला
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लखनऊ लोकसभा सीट
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ नजाकत और नफासत का शहर है। गंगा-जमुनी तहजीब को समटे हुए है। नवाबों के शहर नाम से इसकी प्रसिद्धि है। 2019 लोकसभा चुनाव में पूरा लखनऊ चुनावी रंग में रंगा हुआ है। दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक कर्मभूमि रही लखनऊ को हाई प्रोफाइल सीटों में गिना जाता है। 28 सालों से इस लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। मौजूदा सांसद गृहमंत्री राजनाथ सिंह हैं। पिछली बार उन्होंने कांग्रेस की प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी को 2 लाख 72 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। राजनाथ सिंह, 17वें लोकसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से एक बार फिर मैदान में हैं। महागठबंधन ने भाजपा से नाराज होकर कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को मैदान में उतारा है। कांग्रेस आध्यात्मिक गुरु प्रमोद कृष्णम् पर दांव खेल रही है। आइए लखनऊ लोकसभा सीट के सियासी इतिहास पर नजर डालते हैं.......
 
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लखनऊ सीट का सियासी इतिहास - फोटो : अमर उजाला
क्या रहा था 2014 का चुनाव परिणाम?
2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा विजयी रही थी। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी को करारी शिकस्त दी थी। राजनाथ सिंह को 5,61,106 वोट मिले थे जबकि रीता बहुगुणा जोशी के खाते में 288,357 वोट आए थे। वहीं, तीसरे नंबर पर बसपा के नकुल दुबे रहे थे जिन्हें 64,449 वोट मिले थे। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अभिषेक सिंह के खाते में 56,771 वोट आए थे। आम आदमी पार्टी ने जावेद जाफरी को मैदान में उतारे थे जिन्हें सिर्फ 41,429 वोट मिले थे।

कुल मतदाता
19,58,847

पुरुष मतदाता
10,54,133

महिला मतदाता
9,04,628
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विजयलक्ष्मी पंडित - फोटो : विकीपीडिया
विधानसभा सीटें और सियासी इतिहास
यूपी की लखनऊ लोकसभा सीट में पांच विधानसभा सीटें आती हैं। ये हैं- लखनऊ पश्चिम, लखनऊ उत्तर, लखनऊ पूर्व, लखनऊ मध्य और लखनऊ कैंट। 1951 चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर विजयलक्ष्मी पंडित ने जीत हासिल की थी। 1952 चुनाव में कांग्रेस के एस. नेहरू को जीत मिली थी। 1957 के चुनाव में पुलिन बिहारी बनर्जी ने जीत हासिल की। 1962 आम चुनाव में भी कांग्रेस के ही बी के धाओन ने जीत का परचम लहराया। 

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हेमवती नंदन बहुगुणा (फाइल फोटो)
1967 में हुए आम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार आनंद नारायण मुल्ला ने जीत दर्ज की थी। 1971 चुनाव में कांग्रेस की शीला कॉल और 1977 में हेमवती नंदन बहुगुणा भारतीय लोकदल के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचे। 1980 और 1984 चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर शीला कॉल ने लगातार दो बार फिर जीत हासिल की। 1989 में मान्धाता सिंह ने जनता दल को लखनऊ में पहली बार जीत दिलाई।
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अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी 5 बार जीते चुनाव, 28 साल से भाजपा का है कब्जा
इसके बाद 1991 से 2004 तक भारतीय जनता पार्टी के अटल बिहारी वाजपेयी लगातार 5 बार जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। 2009 में भाजपा के लालजी टंडन लखनऊ के सांसद बने और साल 2014 में राजनाथ सिंह ने यहां से जीत हासिल की। 1991 से अब तक भाजपा का लखनऊ की सीट पर कब्जा रहा है। राजनाथ सिंह लखनऊ सीट से सांसद बनने से पहले यूपी के मुख्यमंत्री का पद संभाल चुके हैं। वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। दरअसल, दिवंतग पूर्व प्रधानमंत्रीअटल बिहारी वाजपेयी लखनऊ को ऐसे भाये कि 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 के लोकसभा चुनावों में लगतार उनके सिर जनता ने जीत का सहरा बांधा। जबकि इसी लखनऊ ने 1957 और 1962 में अटल बिहारी वाजपेयी को हराकर लौटा दिया था। अगली स्लाइड में पढ़िए इस सीट का जातीय समीकरण
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मतदान (सांकेतिक तस्वीर)
जातीय सीकरण 
ब्राह्मण- 426000
कायस्थ-395000
क्षत्रिय- 177000
कुर्मी-167000
मुस्लिम-450000
एसपी-100000
वैश्य, पंजाबी व सिंधि- 12000
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