भारतीय चुनावी दंगल में कुछ भी असंभव नहीं रहा है। कभी एक दूसरे के धुर विरोधी रहे समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन करके सबको चौंका दिया था। अब सपा-बसपा के गठजोड़ में नया अध्याय जुड़ गया। करीब 24 साल बाद बसपा प्रमुख मायावती और सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव शुक्रवार को एक मंच पर नजर आए।
मुलायम सिंह के चुनावी क्षेत्र मैनपुरी में सपा-बसपा और रालोद की संयुक्त रैली में मायावती ने वहां के लोगों से मुलायम सिंह यादव के लिए वोट मांगे। दोनों ने एक-दूसरे की प्रशंसा की। उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए यह उत्सुकता भरा पल रहा कि पुरानी कड़वाहट को भूलकर मायावती और मुलायम सिंह जनता से मुखातिब हुए।
मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से सपा के उम्मीदवार हैं। वो यहां से लंबे वक्त से चुनाव जीतते आ रहे हैं। सपा अकेले भी यहां चुनाव लड़ती है तो उसकी जीत का समीकरण वही रहता। हालांकि इस बार उसे बसपा का भी समर्थन हासिल है।
गेस्ट हाउस कांड के बाद खत्म हो गया था दोनों का रिश्ता
मुलायम सिंह यादव और कांशीराम के दौर से शुरु हुआ सपा-बसपा के साथ का सफर 1995 में लखनऊ गेस्ट हाउस कांड के बाद दुश्मनी में तब्दील हो गया था, जिसके बाद दोनों दलों के रास्ते जुदा हो गए और लगातार दोनों के बीच कड़वाहट बढ़ती ही चली गई। 2007 में मायावती ने अपने दम पर उत्तरप्रदेश में सरकार बनाई तो सपा 2012 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अपने वजूद को बचाने के लिए मायावती और अखिलेश ने एक बार फिर से गठबंधन किया, जबकि रालोद को भी अपने गठबंधन में शामिल किया है।
भाई मुलायम के लिए शिवपाल ने नहीं उतारा प्रत्याशी
मैनपुरी से मुलायम सिंह 1996, 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में जीतकर संसद पहुंच चुके हैं। सपा से अलग होकर अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ रहे उनके भाई शिवपाल यादव भी मैनपुरी में नेताजी का समर्थन कर रहे हैं। मैनपुरी में करीब 38 प्रतिशत यादव के अलावा बड़ी संख्या में शाक्य मतदाता हैं।
उत्तर प्रदेश ने कांशीराम और मुलायम सिंह की दोस्ती के बाद अखिलेश यादव और मायावती को एक साथ देखा है। ऐसे में दोनों दलों के नेता अपने-अपने समर्थकों के बीच यह संदेश पहुंचाने की कोशिश करेंंगे कि उन्होंने पुराने मतभेद भुला दिए हैं।दोनों अब एक साथ हैं और मतदाता दोनों को मिलकर समर्थन करें।