महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को सभी राजनीतिक दलों के साथ एक बैठक की। इस दौरान एकमत से निर्णय लिया गया कि स्थानीय निकाय चुनावों को तब तक स्थगित किया जाए जब तक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के राजनीतिक पिछड़ेपन पर एक साफ तस्वीर देने वाले अनुभवजन्य आंकड़े संकलित नहीं कर लेता।
बैठक के बाद इस फैसले का एलान करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण व्यवस्था फिर से बहाल करने के लिए अनुभवजन्य डाटा की जरूरत है। इस बयान के अनुसार बैठक में महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एमएसबीसीसी) को ओबीसी पर प्रासंगिक डाटा संकलित करने और काम पूरा होने तक स्थानीय निकाय चुनावों को स्थगित करने का निर्देश देने का फैसला लिया गया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग को डाटा एकत्रित करने का काम जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि कुल आरक्षण 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी राज्य सरकार के इस फैसले का समर्थन किया और सहमति जताई।