उत्तराखंड और पंजाब चुनावों पर भी नजर
दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता डॉक्टर अरुण शर्मा कहते हैं कि ऐसा संभव ही नहीं हो सकता कि इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग न दिया जाए। क्योंकि इतना बड़ा मुद्दा गैर-राजनीतिक हो जाए, ऐसा देश की कोई भी विपक्षी राजनीतिक पार्टी नहीं होने देना चाहेगी। और लखीमपुर बवाल में तो बिल्कुल नहीं होने देना चाहेगी क्योंकि उत्तर प्रदेश समेत इसके पड़ोसी राज्य उत्तराखंड और पंजाब में चुनाव हैं। जहां पर सभी राजनैतिक विपक्षी पार्टियां सत्ता पक्ष के विरोध में इस पूरे मामले को आगे लेकर जाना चाहती हैं और जा भी रही हैं।
पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत सभी पंजाबी और सिख बाहुल्य प्रदेशों में लखीमपुर विवाद में मारे गए चारों किसानों के अस्थि कलश को ले जाया जा रहा है। और इन सभी जगहों पर अस्थि कलश के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी का विरोध किया जा रहा है। किसान मोर्चा किसी राजनीतिक पार्टी को इसमें शामिल नहीं होने देना चाहता है। बावजूद इसके सभी राजनीतिक दल इसमें शामिल होकर राजनीतिक नफा देख रहे हैं। कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जिन किसानों की लखीमपुर बवाल के दौरान मौत हुई, उनके अस्थि कलश पूरे देश के जिन राज्यों और जिलों में ले जाया जाएगा, वहां पर कांग्रेस के कार्यकर्ता उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ा मिलेगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वह इस पूरे मामले में राजनीतिक नफा नुकसान नहीं देख रहे हैं बल्कि वह दबे-कुचले और जरूरतमंद लोगों के साथ खड़े होकर सत्ता पक्ष को यह बताना चाहते हैं कि इनके साथ अन्याय ठीक नहीं है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ल कहते हैं कि ऐसा संभव ही नहीं है कि इतने बड़े घटनाक्रम को कोई राजनैतिक पार्टी हाईजैक ना करना चाहे। खन्ना के मुताबिक कांग्रेस शुरुआत से ही इस पूरे मामले में बढ़-चढ़कर किसानों और मृतकों के साथ खड़ी नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी और बसपा के बड़े नेता भी इस पूरे मामले में मृतक किसानों से आकर मिले और उन्हें अपना समर्थन भी दिया। लेकिन जिस तरीके से प्रियंका गांधी और उनके नेता इस पूरे मामले में तिकुनिया से लेकर लखनऊ और बनारस से लेकर दिल्ली तक मुद्दे को आगे लेकर जा रहे हैं उससे एक बात तो स्पष्ट है कि कांग्रेस इस मामले में लीड लेती हुई दिख रही है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसका चुनाव में कितना असर होगा, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन कांग्रेस को इस पूरे मामले से एक बड़े विपक्ष की भूमिका के तौर पर सामने आने का मौका मिला है और वह उसको उसी तरीके से आगे भी बढ़ा रही है।