सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर हिंसा की जांच में ढिलाई पर उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसा लगता है, जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है। पुलिस पांव घिसटते हुए आगे बढ़ रही है। उसे कम-से-कम जांच में इरादतन देरी की शंका तो दूर करनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि ऐसा न हो कि जांच कोई अंतहीन कथा बन जाए। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के सामने जल्द-से-जल्द गवाहियां पूरी करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा, गवाहों व पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
मामले में अगली सुनवाई 26 अक्तूबर को होगी। लखीमपुर में तीन अक्तूबर को कार से किसानों को कुचले जाने और भीड़ हिंसा के कारण आठ लोग मारे गए थे। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र समेत दस आरोपियों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
मामले में दो वकीलों की पत्र याचिका पर हुई सुनवाई में यूपी सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट सौंपी। इसमें बताया गया है कि घटना के 44 चश्मदीदों में से चार की गवाही हो चुकी है।