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लद्दाख: डेपसांग पर कोई बात नहीं करना चाहता चीन, सही वक्त के इंतजार में भारत

Mon, 05 Jul 2021 09:09 PM IST
योगेश साहू शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

लद्दाख में चीन के सैनिक भारतीय कब्जे वाले डेपसांग में तैनात हैं और यहां से चीन अपनी फौज को पीछे ले जाने के लिए भारत के साथ अभी किसी बातचीत का इच्छुक नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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लद्दाख में चीन के सैनिक भारतीय कब्जे वाले डेपसांग में तैनात हैं और यहां से चीन अपनी फौज को पीछे ले जाने के लिए भारत के साथ अभी किसी बातचीत का इच्छुक नहीं है। राजनयिक और सैन्य सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार डब्ल्यूएमसीसी (सीमा पर वर्किंग मैकेनिज्म ऑन कंसल्टिंग एंड कोआर्डिनेशन) की बैठक में भी चीन ने इस मुद्दे पर बातचीत में कोई रुचि नहीं दिखाई और न हीं क्षेत्रीय सैन्य कमांडर स्तर पर ही इस पर चर्चा हो पाने के आसार हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने डेपसांग को लेकर कुछ नहीं कहा।

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बताते हैं चीन के सैनिक भारतीय सैनिकों को न केवल डेपसांग में गश्त करने से रोकते हैं, बल्कि इस क्षेत्र पर अपना दावा भी जताते हैं। डेपसांग में चीन के करीब दो डिवीजन सैनिक तैनात हैं। पिछले साल मार्च महीने तक भारतीय सुरक्षाबल डेपसांग तक गश्त कर रही थी, लेकिन अप्रैल 2021 से चीन की सेना ने भारतीय सुरक्षा बलों की गश्त को रोक दिया है। बताते चलें कि डेपसांग में सबसे पहले 2002 में चीन के सैनिक आए थे, लेकिन प्रतिवाद के बाद लौट गए थे। 2013 में फिर चीन के सैनिक डेपसांग में आए। उन्होंने अपने तंबू गांड़ दिए थे। भारतीय सुरक्षा बलों ने प्रतिवाद किया और 25 दिनों तक गतिरोध बना रहा। इसके बाद चीन के सैनिक लौट गए।

क्यों है डेपसांग का महत्व?
भारत और चीन दोनों के लिए डेपसांग का प्लेन सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पूरे लद्दाख में सीमा के निकट यही इकलौता क्षेत्र भी है जो समतल है। यहां से विश्व की सबसे ऊंची एयरफील्ड दौलत बेग ओल्डी महज 28-30 किमी दूर है। 255 किमी लंबी दरबुक-श्योक-दौलत बेग रोड यहीं से गुजरती है। डेपसांग से इन दोनों पर सीधी नजर रखी जा सकती है। यहां से थोड़ी दूर पर ही चीन का जी-219 हाई-वे गुजरता है। यह तिब्बत को शिंजियांग प्रांत से जोड़ता है। डेपसांग के इस मैदानी (समतल) क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा बलों की पांच पैट्रोलिंग (पीपी 10, 11, 11ए, 12 और 13) चौकियां हैं। इन पांचों चौकियों तक गश्त करके भारतीय सुरक्षा बल जहां दौलत बेग ओल्डी एयरफील्ड, दरबुक-श्योक दौलतबेग रोड को कवर दे सकते हैं, वहीं चीन के राजमार्ग पर भी सीधी निगरानी रख सकते हैं। लेकिन पिछले साल अप्रैल 2020 से भारतीय सुरक्षा बल इन पांचों पैट्रोलिंग प्वाइंट तक नहीं जा पा रहे हैं।  
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भारत अपनी एक भी इंच जमीन नहीं छोड़ेगा
सैन्य सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी एक इंच भी जमीन नहीं छोड़ेगा। वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि डेपसांग से चीनी सैनिकों का विसैन्यीकरण पेचीदा मसला है। देखना होगा कि कैसे भारत इस क्षेत्र की चौकियों तक अपने सुरक्षा बलों की गश्त सुनिश्चित कर पाता है। माना जा रहा है कि भारत ने अभी चीन के साथ विसैन्यीकरण हो पाने वाले क्षेत्रों पर बातचीत कर रहा है। 

इन क्षेत्रों से चीनी सैनिकों का लाव-लश्कर पीछे जाने के बाद डेपसांग जैसे पेचीदा क्षेत्रों को खाली कराने पर चर्चा होगी। भारत का साफ कहना है कि लद्दाख क्षेत्र में चीनी सैनिकों की घुसपैठ और वास्तविक नियंत्रण रेखा की अवधारणा को एकतरफा तरीके से बदलने का प्रभाव दोनों देशों के द्विपक्षीय, कारोबारी रिश्ते पर पड़ रहा है। यह स्थितियां तब तक बनी रहेंगी, जब तक चीन अपने सैनिकों को वास्तविक नियंत्रण रेखा के पुराने तैनाती वाले स्थल पर नहीं ले जाता।

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