साल 1989 में लाल कृष्ण आडवाणी नहीं चाहते थे कि गुजरात के गांधीनगर से उनके बेटे जयंत आडवाणी लोकसभा का चुनाव लड़ें, जबकि इस सीट से जयंत के आसानी से जीतने की संभावना थी। इस बात का खुलासा एक नई किताब में किया गया है।
तीन दशकों तक आडवाणी के असिंस्टेंट रहे विश्वंभर श्रीवास्तव ने एक किताब लिखी है, जिसका शीर्षक 'आडवाणी के साथ 32 साल' है। इसे दिल्ली के अनिल प्रकाशन ने छापा है, किताब का विमोचन शुक्रवार को होगा। कवर पेज पर आडवाणी और विश्वंभर की तस्वीरें लगी हैं। किताब के शीर्षक से ही पता चलता है कि आडवाणी के जीवन से जुड़े कुछ गूढ़ रहस्य इसमें छिपे हो सकते हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक आडवानी ने देश का उप-प्रधानमंत्री रहते हुए अपने पुराने दोस्त और अहमदाबाद (पूर्व) से तत्कालीन सांसद हरिन पाठक से कहा था कि उनके बेटे गांधी नगर से असानी से जीत सकते हैं, लेकिन वो उसे वहां से चुनाव नहीं लड़ाएंगे।
किताब में कहा गया है कि आडवाणी ने नई दिल्ली सीट से इस्तीफा देना चाहते थे और गांधीनगर से मैदान में उतरना चाहते थे।
जब चुनाव हुए तो फिल्म स्टार राजेश खन्ना ने कांग्रेस के टिकट पर गांधीनगर से बाजी मारी।