आम तौर पर 'अखाड़ा' शब्द सुनते ही हमारी आंखों के सामने पहलवान और कुश्ती जैसे चित्र उभरने लगते हैं। लेकिन कुंभ में साधु-संतों के अखाड़े होते हैं। यहां भी जोर-आजमाइश होती है, लेकिन इसके पीछे वजह होती है धार्मिक वर्चस्व की लड़ाई।
इन अखाड़ों की शाही सवारी निकाली जाती है, जिसमें रथ, हाथी-घोड़े की सजावट, घंटा-बाजे, साधुओं के करतब और यहां तक कि तलवार और बंदूक तक का प्रदर्शन होता है। लेकिन सबसे पहले आपको बेहद संक्षेप में यह बता देते हैं कि आखिर कुंभ क्या होता है, कितने प्रकार का होता है और कहां-कहां आयोजित होता है।
कुंभ मेले की शुरुआत कब हुई और किसने इसका आयोजन शुरू किया, इतिहास के आधुनिक ग्रंथों में इसकी कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन इसका जो लिखित प्राचीनतम वर्णन उपलब्ध है वह सम्राट हर्षवर्धन के समय का है, जिसे चीन के प्रसिद्ध तीर्थयात्री ह्वेनसांग ने लिखा था।
सदियों से इस पर्व पर एकत्रित होने के लिए किसी निमंत्रण की आवश्यकता नहीं पड़ती है और लोग अपने आप लाखों और करोड़ों की संख्या में कुंभ पर्व पर प्रयाग में संगम तट पर एकत्रित हो जाते हैं।