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Kumbh Mela 2019 Importance: मुगलकाल में भी होता था कुंभ, क्या है अखाड़ों का इतिहास और महत्व

Wed, 16 Jan 2019 03:32 PM IST
अनिल पांडेय अनिल पांडेय, नई दिल्ली
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kumbh mela
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आम तौर पर 'अखाड़ा' शब्द सुनते ही हमारी आंखों के सामने पहलवान और कुश्ती जैसे चित्र उभरने लगते हैं। लेकिन कुंभ में साधु-संतों के अखाड़े होते हैं। यहां भी जोर-आजमाइश होती है, लेकिन इसके पीछे वजह होती है धार्मिक वर्चस्व की लड़ाई। 
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इन अखाड़ों की शाही सवारी निकाली जाती है, जिसमें रथ, हाथी-घोड़े की सजावट, घंटा-बाजे, साधुओं के करतब और यहां तक कि तलवार और बंदूक तक का प्रदर्शन होता है। लेकिन सबसे पहले आपको बेहद संक्षेप में यह बता देते हैं कि आखिर कुंभ क्या होता है, कितने प्रकार का होता है और कहां-कहां आयोजित होता है।

कुंभ मेले की शुरुआत कब हुई और किसने इसका आयोजन शुरू किया, इतिहास के आधुनिक ग्रंथों में इसकी कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन इसका जो लिखित प्राचीनतम वर्णन उपलब्ध है वह सम्राट हर्षवर्धन के समय का है, जिसे चीन के प्रसिद्ध तीर्थयात्री ह्वेनसांग ने लिखा था। 
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सदियों से इस पर्व पर एकत्रित होने के लिए किसी निमंत्रण की आवश्यकता नहीं पड़ती है और लोग अपने आप लाखों और करोड़ों की संख्या में कुंभ पर्व पर प्रयाग में संगम तट पर एकत्रित हो जाते हैं।

कुंभ, अर्धकुंभ और सिंहस्थ का फर्क

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  1. कुंभ क्या हैः कलश को कुंभ कहा जाता है। कुंभ का अर्थ होता है घड़ा। इस पर्व का संबंध समुद्र मंथन के दौरान अंत में निकले अमृत कलश से जुड़ा है। देवता-असुर जब अमृत कलश को एक दूसरे से छीन रह थे तब उसकी कुछ बूंदें धरती की तीन नदियों में गिरी थीं। जहां जब ये बूंदें गिरी थी उस स्थान पर तब कुंभ का आयोजन होता है। उन तीन नदियों के नाम है: गंगा, गोदावरी और क्षिप्रा।
  2. अर्धकुंभ क्या है: अर्ध का अर्थ है आधा। हरिद्वार और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ का आयोजन होता है। पौराणिक ग्रंथों में भी कुंभ एवं अर्ध कुंभ के आयोजन को लेकर ज्योतिषीय विश्लेषण उपलब्ध है। कुंभ पर्व हर 3 साल के अंतराल पर हरिद्वार से शुरू होता है। हरिद्वार के बाद कुंभ पर्व प्रयाग नासिक और उज्जैन में मनाया जाता है। प्रयाग और हरिद्वार में मनाए जानें वाले कुंभ पर्व में एवं प्रयाग और नासिक में मनाए जाने वाले कुंभ पर्व के बीच में 3 सालों का अंतर होता है। यहां माघ मेला संगम पर आयोजित एक वार्षिक समारोह है।
  3. सिंहस्थ क्या है: सिंहस्थ का संबंध सिंह राशि से है। सिंह राशि में बृहस्पति एवं मेष राशि में सूर्य का प्रवेश होने पर उज्जैन में कुंभ का आयोजन होता है। इसके अलावा सिंह राशि में बृहस्पति के प्रवेश होने पर कुंभ पर्व का आयोजन गोदावरी के तट पर नासिक में होता है। इसे महाकुंभ भी कहते हैं, क्योंकि यह योग 12 वर्ष बाद ही आता है। इस कुंभ के कारण ही यह धारणा प्रचलित हो गई की कुंभ मेले का आयोजन प्रत्येक 12 वर्ष में होता है, जबकि यह सही नहीं है।

यहां होता है कुंभ का आयोजन

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अखाड़े और कुंभ

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अखाड़ों का इतिहास

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परी अखाड़ा और किन्नर अखाड़ा

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कुंभ और विवाद

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मुगलकाल में कुंभ का पहला विवरण

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