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Bengal: कोलकाता में जुटे देशभर के साहित्यकार, राष्ट्रीय संगोष्ठी में 'हिंदी और भारतीय साहित्य' पर की चर्चा

Sat, 13 May 2023 08:02 PM IST
श्वेता महतो अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता

सार

कार्यक्रम में कलकत्ता विश्वविद्यालय के साथ राज्य के कई अन्य शैक्षणिक संस्थानों से भी विद्यार्थी जुड़े। उदघाटन सत्र में कोल इंडिया लिमिटेड के निदेशक विनय रंजन और प्रेम शंकर त्रिपाठी (प्रोफेसर सुरेंद्रनाथ सांध्य कॉलेज) सहित कई अतिथि उपस्थित थे।
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National Seminar - फोटो : Social Media
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विस्तार
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राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यापन परिषद ने 'कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग रवींद्र जयंती के उपलक्ष्य में यहां राजाबाजार साइंस कॉलेज, कोलकाता में "हिंदी और भारतीय साहित्य" विषय पर 'एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी' का आयोजन किया। संगोष्ठी में देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक और प्राध्यापिकाएं शामिल हुईं और साहित्य के विविध रूपों पर चर्चा की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के बाद मां शारदा की वंदना से हुई। कोलकाता विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामप्रवेश रजक ने सभी मेहमानों का स्वागत किया।
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गोष्ठी के प्रथम सत्र में मंच संचालन विभागाध्यक्ष ने किया। इस सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका प्रो.कुमुद शर्मा, कलकत्ता विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका प्रो. राजश्री शुक्ला,उत्तर बंग विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका प्रोफेसर मनीषा झा, पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. अरुण होता ने साहित्य पर चर्चा की। कार्यक्रम की समन्वयक और कलकत्ता विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका प्रो. डॉ राजश्री शुक्ला ने कहा, भारतीय साहित्य को हम एक भाषा का साहित्य नहीं मान सकते। भारत के समस्त भाषा का साहित्य 'भारतीय साहित्य' है। उन्होंने पूछा भारतीय साहित्य क्या है? इस प्रश्न पर बड़ी विस्तृत चर्चा की। विदेशी साहित्यों के विभिन्न रूपों को बताते हुए भारतीय साहित्य के सृजनात्मक, कल्पनाओं को बचाए रखने के लिए हिंदी को बचाए रखने की प्रेरणा दी। 

प्रो. मनीषा झा ने 'प्रकृति विमर्श' की बात सामने रखी। उन्होंने कहा, पर्यावरण भी साहित्य का हिस्सा है और पर्यावरण की मुक्ति सभी साहित्यों का एक प्रमुख अंश है। मनुष्य का जीवन पर्यावरण को छोड़कर आगे नहीं बढ़ सकता इसलिए पर्यावरण के प्रति संवेदना जरूरी है। प्रोफेसर अरुण होता ने भी अपने विचार रखे।
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कार्यक्रम के दूसरे सत्र का संचालन प्रो. राजश्री शुक्ला ने किया। इस सत्र के प्रमुख वक्ता के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. सुधीर प्रताप सिंह और पूर्व प्रो. डॉ. आनन्द कुमार सिंह रहे। डॉ.आनन्द कुमार सिंह ने कहा, विश्व साहित्य और भारतीय साहित्य के सांस्कृतिक रचनाओं में कोई अंतर नहीं, अंतर समाधान प्रक्रिया में हैं।  वहीं डॉ. सुधीर प्रताप सिंह जी ने भारत की सांस्कृतिक चेतना को भारतीय साहित्य का दर्पण मानते हुए कहा कि "भारतीय जीवन दर्शन में ही सम्पूर्ण जगत की सम्पूर्णता है। उन्होंने अपने वक्तव्य के द्वारा यह चिंता भी व्यक्त की कि हम विमर्शों के दौर में मूल भारतीय चिंतन से दूर होते जा रहे हैं अतः हमें अपने मूल चिंतन की तरप पुनः लौटने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के अंतिम सत्र (तृतीय सत्र) का संचालन विजय कुमार साव ने किया। इस सत्र में त्रिपुरा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रोफेसर डॉ. विनोद कुमार मिश्र, विद्यासागर विश्वविद्यालय केप्रो. डॉ. संजय जयसवाल जी और स्कॉटिश चर्च कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ. गीता दूबे जी उपस्थित रहीं। डॉ. विनोद कुमार मिश्र जी ने असमिया स्त्री विमर्श, बहु पत्नी विवाह, भारतीय भाषा का महत्व एवं पुरानी और नयी पीढ़ी के बीच के संघर्षों के आधार पर अपना राय रखा। डॉ संजय जयसवाल ने अपने वक्तव्य में भारतीय साहित्य को किस नजर से देखा जाएं, भारतीय संस्कृति का मूल चरित्र, वर्तमान में भारतीय साहित्य के समक्ष वैश्विक चुनौतियों, भारतीय साहित्य की अवधारणा आदि विषयों पर चर्चा की। साथ ही भारतीय साहित्य में अनुवाद की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

डॉ. गीता दुबे जी ने कहा कि निराला और टैगोर हिन्दी और बांग्ला साहित्य को पढ़ने के दो सूत्र हैं। उन्होंने विमर्शों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए आत्मकथाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को सबके समक्ष रखा। कार्यक्रम का आयोजन कोल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से किया गया। डॉ. रामप्रवेश रजक ने आयोजन के लिए कोल इंडिया लिमिटेड का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम के अंत में डॉ. रामप्रवेश रजक ने कोल इंडिया लिमिटेड के राजेश कुमार साव, उप प्रबंधक (राजभाषा) और प्रियांशु प्रकाश (उप प्रबंधक) का आभार व्यक्त किया और कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड भारतीय साहित्य के विकास में ईंधन का काम किया है। कार्यक्रम के आयोजन में संकल्प हिन्दी साहित्य सभा और वाद- विवाद समिति से जुड़े द्वितीय और चतुर्थ सत्र के विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम में कलकत्ता विश्वविद्यालय के साथ-साथ राज्य के कई अन्य शैक्षणिक संस्थानों से भी विद्यार्थी जुड़े।कार्यक्रम के उदघाटन सत्र में कोल इंडिया लिमिटेड के निदेशक विनय रंजन और प्रेम शंकर त्रिपाठी (प्रोफेसर सुरेंद्रनाथ सांध्य कॉलेज), अजय चौधरी (कार्यकारी निदेशक,कोल इंडिया) ,निर्मल कुमार दुबे (सहायक निदेशक,राजभाषा विभाग), राजेश कुमार साव (उप-प्रबंधक,कोल इंडिया), प्रियांशु प्रकाश (उप-प्रबंधक,कोल इंडिया) और संदीप सोनी (अनुवादक) सहित कई अतिथि उपस्थित थे।
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