अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई संदीप घोष और घटना के दिन ड्यूटी पर मौजूद चार अन्य डॉक्टरों की ‘लाई डिटेक्टर’ जांच की अनुमति के लिए उन्हें विशेष अदालत लेकर गई थी। उन्होंने बताया कि ‘लाई डिटेक्टर’ जांच केवल अदालत की अनुमति और संदिग्ध की सहमति के बाद ही की जा सकती है।
इससे पहले दिन में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने ट्रेनी डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले को दबाने का प्रयास किया था, क्योंकि जब तक संघीय एजेंसी ने जांच अपने हाथ में ली, तब तक अपराध स्थल में छेड़छाड़ की गई थी।