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क्या है सबरीमाला मंदिर मामला, इसे सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी पीठ के समक्ष क्यों भेजा

Thu, 14 Nov 2019 10:48 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Sabarimala temple
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर अपना फैसला सुनाया। इसमें कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच के सामने भेजने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर अपना फैसला सुनाया।

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इसमें कोर्ट ने इस मामले को सात न्यायाधीशों वाली बड़ी पीठ के सामने भेजने का निर्णय लिया है। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि बड़ी पीठ में सुनवाई के बाद फैसला आने तक उसका पूर्व में दिया गया फैसला जस का तस बना रहेगा। 


क्या है सबरीमला मंदिर मामला

सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को भारत के दक्षिण भारतीय राज्य केरल स्थित सबरीमला अय्यपा मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर भी अपना आखिरी फैसला सुनाएगा। वैसे तो सर्वोच्च अदालत ने 28 सितंबर, 2018 के फैसले में सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश का अधिकार दे दिया था।

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हालांकि इस फैसले की समीक्षा के लिए 60 याचिकाएं दायर की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों वाली पीठ ने छह फरवरी 2019 को इन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।


काफी लंबी-चौड़ी बहस हुई

बता दें कि 28 सितंबर 2018 को सीजेआई रंजन गोगोई की अगुवाई में जस्टिस आर फली नरीमन, जस्टिस एएम खानविल्कर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पीठ ने सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से नाखुश कई संस्थाओं और समूहों ने इसकी समीक्षा के लिए याचिकाएं दायर कीं। फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने वालों में नायर सर्विस सोसायटी (एनएसएस) और मंदिर के तंत्री (पुजारी) भी शामिल हैं।

सबरीमला में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर भारत में काफी लंबी-चौड़ी बहस हुई है। मासिक धर्म से गुजरने वाली महिलाओं को मंदिर में न जाने दिए जाने को महिलावादी और प्रगतिशील संगठनों ने महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन बताया है।

वहीं, कई धार्मिक संगठनों की दलील है कि चूंकि अयप्पा ब्रह्मचारी माने जाते हैं, इसलिए 10-50 वर्ष की महिलाओं को उनके मंदिर में जाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

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