भोपाल की अधूरी ताजुल मस्जिद
- फोटो : राजभवन, मध्य प्रदेश
भोपाल के नवाब का समर्थन मुस्लिम लीग को
साल 1926 में भोपाल के नवाब बने हमीदुल्लाह खान मुस्लिम लीग के सक्रिया सदस्य थे और 1930-32 में हुए गोलमेज सम्मेलन में खास प्रतिनिधि भी चुने गए थे। पूरे जग में मोहम्मद अली जिन्ना और हमीदुल्लाह खान की दोस्ती और वफादारी के किस्से गूंजते थे।
बावजूद इसके साल 1947 में जब भारत और पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने की बात आई तो हमीदुल्लाह ने कश्मीर, हैदराबाद, सिक्किम जैसी रियासतों की तरह खुद के लिए अपनी एक स्वायत्त रियासत की दलील दी और दोनों विकल्पों में विलय करने के लिए मना कर दिया।