18वीं लोकसभा के गठन के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को विपक्ष का नेता बनाया गया हैं। पहली बार किसी संवैधानिक पद पर बैठे राहुल को आने वाले दिनों में किन चुनौतियां का सामना करना होगा? खबरों के खिलाड़ी में चर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, विनोद अन्निहोत्री और सुनील शुक्ल ने नेता प्रतिपक्ष के समक्ष चुनौतियों और अवसरों पर विस्तार से बात की।
बीते हफ्ते कई घटना ऐसी हुईं जो सुर्खियों में रहीं। नई लोकसभा के गठन के बाद लोकसभा का पहला सत्र शुरू हो गया। ओम बिरला एक बार फिर से लोकसभा अध्यक्ष बन गए। वहीं, राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी लेना भी सुर्खियों में रहा। राहुल के नेता विपक्ष बनने के क्या मायने हैं? पहली बार किसी संवैधानिक जिम्मेदारी पर बैठे राहुल के सामने आगे क्या चुनौतियां होगी? इन मुद्दों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, विनोद अन्निहोत्री और सुनील शुक्ल मौजूद रहे।
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समीर चौगांवकर: यह एक अच्छा संकेत है। राहुल गांधी सिर्फ कांग्रेस के नेता नहीं है बल्कि विपक्ष के नेता है। उन्हें पूरे विपक्ष को साथ लेकर चलना होगा। राहुल गांधी पहली बार संवैधानिक पद पर बैठे हैं। अगर 2029 में राहुल गांधी लोगों के सामने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी दावेदारी रखना चाहते हैं तो यह उनके लिए अच्छा मौका है। राहुल गांधी को एक बड़ी चुनौतिपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। मुझे लगता है कि उन्होंने इस पद पर एक अच्छी शुरुआत की है। राहुल गांधी की छवि एक गंभीर नेता के तौर पर बन रही है।
विनोद अग्निहोत्री: नेता विपक्ष रूप में राहुल गांधी के पास एक अच्छा अवसर है अपने को प्रस्तुत करने का और यह बताने का कि उनके बारे में जो छवि बनाने की कोशिश की गई वो गलत है। राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने से पहले विपक्षी गठबंधन के सभी नेताओं की बैठक हुई। उसके बाद यह घोषणा की गई कि राहुल नेता प्रतिपक्ष होंगे। जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला चुने गए तब राहुल गांधी की जो भावभंगिमा थी वह भी उनकी परिपक्वता दिखाती है। शुक्रवार को जो राहुल गांधी का वक्तव्य दिया वह भी बहुत परिपक्व वक्तव्य था।
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रामकृपाल सिंह: राहुल गांधी अब तक एक उनमुक्त पंक्षी की तरह थे। जब आप सड़क पर बोलते हैं, मोहल्ले में बोलते हैं उसमें कुछ तथ्यातमक रूप से गलत हो सकता है। वहीं, सदन में आप ऐसा नहीं कर सकते हैं। मैं मानता हूं हर आदमी हर चीज का मास्टर नहीं हो सकता है। लेकिन, विषय हर तरह के आएंगे। अब आपको एमआरपी और एमएसपी बोलते वक्त दोनों का फर्क समझना होगा। इस चुनाव के बाद एक विकल्प की उम्मीद जगी है।
सुनील शुक्ल: राहुल गांधी ने जनता के बीच में विपक्ष की विश्वसनीयता बढ़ाई है। राहुल गांधी को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाना चाहिए जो जनता के सवालों पर सरकार से जूझता रहा है। मुझे नहीं लगता है कि राहुल गांधी ने कोई अगंभीर बात की हो। राहुल गांधी को मैं कई लोकसभा से सुनता आ रहा हूं। कोई यह बताए कि यह अतार्किक बात थी, अगंभीर बात थी। राहुल गांधी की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। सरकार के सामने यह बड़ी चुनौती है जो जनता से जुड़ा है। अगर आप लोगों से जुड़े नहीं हो सकते तो आप इतनी दूर नहीं जा सकते हैं।