केरल हाईकोर्ट अपने समक्ष कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह बात रही। इन याचिकाओं में संविधान के पालन के संबंध में ऑर्थोडॉक्स और जैकोबाइट गुटों के बीच मतभेदों को देखते हुए मलंकारा सीरियन ऑर्थोडॉक्स चर्च से संबंधित चर्चों में धार्मिक सेवाओं को आयोजित करने के लिए पुलिस की सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई थी।
न्यायाधीश दीवान रामचंद्रन ने कहा कि उन सभी लोगों को, जो मलंकरा सीरियन ऑर्थोडॉक्स चर्च का हिस्सा हैं, संविधान का पालन करना होगा। उन्होंने इसका पालन करने में किसी भी तरह की जिद और जबरदस्ती के खिलाफ आगाह करते हुए कहा कि अदालत संविधान को लागू करने में पुलिस बल का उपयोग करने से नहीं कतराएगी।
उन्होंने कहा, 'मुझे पहले ही यह कहना होगा कि कोई भी अदालत, और सबसे बढ़कर यह अदालत, किसी फैसले को लागू करने के लिए किसी भी चर्च में पुलिस या अन्य बलों को भेजने में कोई खुशी नहीं पाएगी। हालांकि, अगर मजबूर किया जाता है, तो निश्चित रूप से उसका विकल्प ढूंढना होगा और जरूरी आदेश देना पड़ सकता है।'
26 तारीख को होगी मामले की अगली सुनवाई
अदालत ने मामले की सुनवाई की तारीख 26 अक्तूबर तय की। केरल हाईकोर्ट ने आगे कहा कि पुलिस अधीक्षक और उनके तहत आने वाले अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि जहां ये चर्च मौजूद हैं वहां सुरक्षा व्यवस्था कायम रहे और किसी भी व्यक्ति को कानून और व्यवस्था का उल्लंघन करने की अनुमति किसी भी स्थिति में न दी जाए।
मंगलवार को अदालत को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की ओर से बताया गया था कि सभी 1934 संविधान का पालन करने पर सहमत हुए थे। हालांकि, जैकोबाइट गुट के वकील ने कहा था कि ऑर्थोडॉक्स समूह कथित तौर पर केवल चर्च पर कब्जा करने और ऐसे किसी भी शख्स को बाहर करने के लिए चिंतित है जिसे वह पसंद नहीं करता।