केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को ओलंपियन मयूखा जॉनी की दोस्त से दुष्कर्म मामले के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आरोपी को केरल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ेगा। मयूखा ने इसी वर्ष जून में प्रेस कांफ्रेंस कर मामले का खुलासा किया था।
जस्टिस शिर्सी वी ने कहा, जमानत याचिका खारिज की जाती है। आपको आत्मसमर्पण करना पड़ेगा। आरोपी ने दलील दी थी कि जनवरी 2016 में कथित घटना के 5 साल बाद दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई गई और दावा किया कि यह इंपीरियर एमैनुअल चर्च के दो गुटों के बीच मतभेदों का नतीजा था।
अभियोजन ने 2 अगस्त को आरोपी की याचिका का इस आधार पर विरोध किया था कि उससे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है और उसका फोन भी बरामद करना है। आरोपी सीसी जॉनसन ने यह भी दावा किया था कि वह और पीड़िता गिरजाघर के सदस्य थे और उसके गिरजाघर छोड़ने के बाद दुष्कर्म की यह शिकायत दर्ज कराई गई।
बता दें कि केरल पुलिस ने ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी महिला एथलीट मयूखा जॉनी और 9 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। यह मुकदमा मयूखा की दोस्त के दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने के लिए एक स्थानीय धार्मिक संगठन के पूर्व ट्रस्टी की शिकायत पर अदालत के निर्देश के बाद बृहस्पतिवार को दर्ज किया गया। मयूखा और अन्य 9 आरोपी इस स्वतंत्र धार्मिक संगठन के पदाधिकारी हैं।
पुलिस के मुताबिक, धार्मिक संगठन के पूर्व ट्रस्टी साबू ने छालाकुडी में एक अदालत में याचिका दाखिल की थी। याचिका में साबू ने मयूखा व 9 अन्य पदाधिकारियों पर अपने खिलाफ दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने और धमकी देने का आरोप लगाया था। साबू का आरोप है कि यह झूठा आरोप उसे बदनाम करने के लिए लगाया गया।
साबू के मुताबिक, धमकी वाला झूठा पत्र मयूखा और उनकी टीम ने प्लांट किया था। हमने अदालत में इसके डिजिटल सबूत एक सीडी में दाखिल किए थे। अदालत ने बाद में पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया।
इससे पहले रविवार को मयूखा ने खुद को गुमनाम आदमी की तरफ से भेजा गया धमकी भरा पत्र मिलने का आरोप लगाया था। मयूखा का कहना था कि धमकी देने वाला उसे अपनी दोस्त के लिए लड़ाई लड़ने से रोकना चाहता है, जिसने इस साल मार्च में एक प्रभावशाली आदमी के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था।