वर-वधू के उपस्थित हुए बिना भी विवाह का पंजीकरण किया जा सकता है। केरल हाई कोर्ट ने यह निर्देश विशेष विवाह अधिनियम के तहत सुनवाई के दौरान दिए। कोर्ट ने कहा, इसमें दोनों पक्षों की पहचान करना चुनौती थी, लेकिन अब विकल्प के तौर पर फेसियल रिकॉग्निशन और बायोमीट्रिक जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
जस्टिस मुहम्मद मुस्ताक और कौसर एडप्पागठ की पीठ ने केंद्र के अधिवक्ता से इस संबंध में पक्षकारों की पहचान के लिए फेसियल रिकॉग्निशन व अन्य तकनीकों के इस्तेमाल पर केंद्र से नीतिगत निर्देश लेने के लिए कहा।
खंडपीठ ने एकल पीठ के जस्टिस पीबी सुरेश कुमार के नजरिये से सहमति जताते हुए कहा, यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि वर-वधू की भौतिक उपस्थिति के बिना विवाह पंजीकृत किया जा सकता है। हालांकि, पंजीकरण अधिकारी दोनों की पहचान सुनिश्चित करने की स्थिति में होना चाहिए। ऑनलाइन इस पहचान को तय करने की प्रक्रिया के बारे में विचार करने की जरूरत है।
विदेश में रहने वाले जोड़े में समस्या
एकल पीठ की सुनवाई में सरकार का तर्क था, विवाह पंजीकरण के लिए वर-वधू की विवाह अधिकारी के सामने मौजूदगी जरूरी है। किसी एक पक्ष का व्यक्ति विवाह पंजीयन अधिकारी का क्षेत्रीय निवासी होना चाहिए। ऐसे में विदेश में रहने वाले दो लोगों का विवाह पंजीकृत नहीं किया जा सकता।