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केरल हाईकोर्ट का फैसला : विवाह पंजीयन के लिए वर-वधू की मौजूदगी जरूरी नहीं, तकनीक का कर सकेंगे इस्तेमाल

Mon, 06 Sep 2021 08:40 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि

सार

केरल हाईकोर्ट ने विशेष विवाह कानून के तहत शादी के पंजीयन के लिए बड़ी राहत दे दी। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर मौजूद रहे बिना भी विवाह पंजीयन कराया जा सकता है। 
 
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केरल हाईकोर्ट
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विस्तार
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केरल हाईकोर्ट ने विवाह पंजीयन के मामले में वर-वधु को सोमवार को बड़ी राहत दे दी। अब विशेष विवाह कानून (SMA) के तहत नवयुगलों की निजी तौर पर मौजूदगी के बगैर भी विवाह पंजीयन किया जा सकेगा। कोर्ट ने इसके लिए फेशियल रिग्निशन सॉफ्टवेयर या बायोमैट्रिक जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की भी इजाजत दे दी। 

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व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे बगैर भी विवाह पंजीयन की अनुमति देते हुए हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पंजीयन अधिकारी के लिए दोनों पक्षों की पहचान इसमें बड़ी चुनौती होगी, लेकिन इसके लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

आईटी व विदेश मंत्रालय को बनाया पक्षकार
केरल हाईकोर्ट की कोच्चि पीठ के जस्टिस मुहम्मद मुश्ताक व कौसर एदप्पागत ने कहा कि ऐसे मामलों में तकनीक का किस तरह इस्तेमाल हो सकता है, उसकी उन्हें विशेषज्ञता नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय व विदेश मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया। 
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पीठ ने केंद्र सरकार के वकील को निर्देश दिया कि वह फेसिलय रिग्निशन तकनीक व व अन्य टूल के इस्तेमाल से संबंधित पक्षों की पहचान करने को लेकर सरकारी नीतियों की जानकारी पेश करे। हाईकोर्ट ने यह मामला एकल पीठ द्वारा बड़ी बेंच को भेजे जाने के बाद कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इन याचिकाओं में सवाल उठाया गया था कि क्या वर वधू की भौतिक रूप से मौजूदगी के बगैर भी एसएमए के तहत विवाह पंजीयन कराया जा सकता है? याचिका में इसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या आनलाइन तरीकों को सुझाया गया है। 

इससे पहले एकल पीठ के न्यायाधीश पी बी सुरेश कुमार ने इस मामले को एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया था, क्योंकि केरल हाईकोर्ट के दो अन्य जजों की पीठ ने फैसला सुनाया था कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एसएमए के तहत विवाह की अनुमति अधिनियम के प्रावधानों को कमजोर कर देगी। विवाह पंजीयन के लिए दोनों पक्षों की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य है। 

पिछले माह दी थी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पंजीयन की अनुमति
इससे पहले सात अगस्त को केरल हाईकोर्ट ने विदेश में काम करने वाले एक व्यक्ति को अपनी शादी का पंजीकरण कराने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश होने की अनुमति दे दी थी । महामारी के कारण यात्रा संबंधी पाबंदी के कारण वह व्यक्ति स्वदेश नहीं आ पा रहा था। अदालत का यह आदेश व्यक्ति की 28 वर्षीय पत्नी की याचिका पर आया था, जिसने कहा कि उसका पति कनाडा में काम करता है और विशेष विवाह कानून के तहत दोनों की जुलाई 2019 में शादी हुई थी। महिला ने अपनी याचिका में कहा कि विवाह पंजीकरण नियम केरल, 2008 के तहत दंपति अपने विवाह के पंजीकरण के लिए पंचायत के विवाह पंजीयक के सामने पेश नहीं हो सका। महिला ने अदालत से अनुरोध किया कि शादी के पंजीकरण के लिए उसके पति को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश होने की इजाजत दी जाए और इसे ही उपस्थिति का प्रमाण पत्र माना जाए। स्थिति का संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश होने की अनुमति दे दी और विवाह पंजीयक को इसके लिए निर्देश जारी किया था।

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