अभिनेता और माकपा विधायक मुकेश को मंगलवार को कथित दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इसी तरह के आरोपों का सामना कर रहे एक अन्य अभिनेता सिद्दीकी को केरल उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक मुकेश को विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा औपचारिक गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया, क्योंकि उन्हें इस महीने की शुरुआत में कोच्चि की एक सत्र अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, एक अभिनेत्री की ओर से एक दशक पहले कोच्चि में कथित रूप से दुष्कर्म की शिकायत पर गिरफ्तारी से पहले मुकेश से साढ़े तीन घंटे तक पूछताछ की गई। मुकेश के वकील ने बताया कि अभिनेता को गिरफ्तार किया गया, उनकी मेडिकल जांच और पौरुष परीक्षण किया गया और बाद में रिहा कर दिया गया। इस बीच पुलिस ने 2016 में एक युवा अभिनेत्री से जुड़े दुष्कर्म मामले में सिद्दीकी की जमानत याचिका को हाईकोर्ट से खारिज किए जाने के बाद उसकी तलाश शुरू कर दी है। उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है।
मुकेश के खिलाफ वडक्कनचेरी और मरदु पुलिस ने दो मामले दर्ज किए गए थे। एर्नाकुलम जिला और सत्र न्यायालय ने 5 सितंबर को महिला अभिनेता की ओर से उसके खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मामले में मुकेश को जमानत दे दी थी। महिला के आरोप के बाद मुकेश के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभिनेता ने दावा किया कि शिकायतकर्ता द्वारा ब्लैकमेल करने के प्रयासों के आगे झुकने से इनकार करने के कारण आरोप लगाए गए थे।
कोर्ट ने क्या कहा?
केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को दुष्कर्म मामले में मलयालम फिल्म अभिनेता सिद्धीक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। अदालत ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उनसे हिरासत में पूछताछ जरूरी है, ताकि अपराध की उचित जांच की जा सके।
अदालत ने कहा- जमानत के लिए उपयुक्त मामला नहीं
जस्टिस सी.एस. डियास ने कहा, चूंकि सिद्धीक ने इस घटना में शामिल होने से पूरी तरह से इनकार किया था, इसलिए उनका अभी 'पोटेंसी परीक्षण' होना बाकी है। साथ ही यह भी संभावना है कि वह गवाहों को धमका सकते हैं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसलिए यह मामला जमानत देने के लिए उपयुक्त नहीं है।
पोटेंसी परीक्षण क्या है?
पोटेंसी परीक्षण यह तय करने के लिए किया जाता है कि किसी व्यक्ति की यौन शक्ति और प्रजनन क्षमता कितनी है। यह परीक्षण आम तौर पर तब किया जाता है, जब किसी पर यौन अपराध का आरोप होता है। ताकि यह देखा जा सके कि वह व्यक्ति यौन संबंधन बनाने में सक्षम था या नहीं।
'आरोपी से पुलिस हिरासत में पूछताछ जरूरी'
जस्टिस डियास ने अपने आदेश में कहा, "तथ्यों की पूरी जांच, इससे जुड़े कानून और दी गई दलीलों और आरोपों की प्रकृति, गंभीरता और सिद्धिक की संलिप्तता के प्राथमिक सबूतों से स्पष्ट है कि अपराध की उचित जांच के लिए आरोपी की हिरासत में पूछताछ जरूरी है। उन्होंने आगे कहा, इसलिए मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि यह अदालत की विवेकाधीन वाली शक्तियों का उपयोग करने के लिए उपयुक्त मामला नहीं है। इस, संदर्भ में मैं याचिका को खारिज करने का आदेश देता हूं।
अभिनेत्री ने लगाया है यौन उत्पीड़न का आरोप
आरोपी सिद्धीक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (दुष्कर्म) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। सिद्धीक ने अपनी याचिका में दावा किया कि शिकायतकर्ता अभिनेत्री 2019 से उन्हें परेशान करने और झूठे आरोप लगाने का अभियान चला रही हैं।