हिंदू मन्दिरों का पूर्ण नियंत्रण हिन्दू समुदाय के हाथों में सौंपने के लिए विश्व हिन्दू परिषद एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी। इस अभियान के अंतर्गत विहिप के सभी राज्य इकाई अपने यहां जनजागरण अभियान चलाएंगे। वे मुख्यमंत्री और राज्यपालों से मिलकर मन्दिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए ज्ञापन देंगे। विहिप का कहना है कि मन्दिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए धरना-प्रदर्शन और सामाजिक जनजागरण किया जाएगा। यह भी आरोप है कि तिरुपति मंदिर के चढ़ावे से धर्मांतरण कराने वाली संस्थाओं को राशि दी गई है।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) नेता डॉ सुरेंद्र जैन ने मंगलवार को एक प्रेसवार्ता करते हुए कहा कि न्यायालयों ने अपने कई निर्णयों में यह स्पष्ट कहा है कि मंदिरों का प्रशासन चलाना सरकार का काम नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से तिरुपति विवाद सामने आए हैं, उससे यह साफ हो जाता है कि अब हिन्दू मंदिरों का प्रशासन हिन्दू समाज को सौंप देनी चाहिए। विहिप के अनुसार हिन्दू मंदिरों का धन हिन्दू समाज के गरीब लोगों के हितों के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। इसे देखते हुए संगठन 'हिन्दू समाज का धन हिंदुओं के लिए' नाम से अभियान चलाएगी। इसकी शुरुआत आंध्रप्रदेश में तिरुपति मन्दिर से शुरू हो चुकी है।
विश्व हिंदू परिषद ने मंदिरों को चढ़ावे के रूप में मिली धनराशि का इस्तेमाल हिंदू विरोधी कार्यों में करने का आरोप भी लगाया है। विहिप के संयुक्त महामंत्री डाॅ. सुरेंद्र जैन ने दावा किया कि आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर के प्रबंधन ने श्रद्धाभाव से अर्पित की गई देव राशि (चढ़ावा) का न सिर्फ सरकारी अधिकारियों-राजनेताओं ने दुरुपयोग किया, बल्कि इसे हिंदुओं का धर्मांतरण करने वाली संस्थाओं में भी बांटा गया।
जैन ने दावा किया कि केरल और तमिलनाडु के मंदिरों के प्रबंधन की ओर से भी ऐसे कृत्य करने के लगातार समाचार मिल रहे हैं। जैन ने कहा कि बहुसंख्यक हिंदू समाज अब अपनी आस्था से खिलवाड़ को सहन नहीं करेगा। राज्य सरकारें एक निश्चित समय में हिंदू मंदिरों से अपना नियंत्रण हटा लें। विहिप इसके लिए देशभर के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों को ज्ञापन देगा। अगर मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने में देरी हुई तो विहिप देशव्यापी आंदोलन करेगा।
गोविंद देव मंदिर से ईदगाह को मिला अनुदान
विहिप के संयुक्त महामंत्री ने कहा कि दक्षिण भारत के कई राज्यों से चढ़ावे की राशि में भ्रष्टाचार और इसके दुरुपयोग के समाचार आ रहे हैं। कुछ दिन पूर्व ही यह खुलासा हुआ कि राजस्थान में कांग्रेस शासनकाल के दौरान प्रसिद्ध गोविंद देव मंदिर से 9.82 करोड़ रुपये ईदगाह को दे दिए गए। तिरुपति सहित कई मंदिरों की चढ़ावे की राशि से धर्मांतरण कराने वाली संस्थाओं को अनुदान दिया गया।