उच्च न्यायालय ने अपने शुक्रवार के अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि यह फैसला अदालत के अगले आदेश के अधीन है। अदालत ने मामले पर आगे विचार के लिए एक दिसंबर की तारीख तय की।
अदालत ने यह आदेश आइजैक की ओर से दायर एक याचिका के जवाब में जारी किया। याचिका में ईडी द्वारा उन्हें जारी किए गए दो समन को रद्द करने की मांग की गई थी। ये समन केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) के वित्तीय लेन-देन में कथित गड़बड़ी की एजेंसी की जांच का हिस्सा हैं।
न्यायमूर्ति देवन रामचंद्र ने अपने पहले जारी अंतरिम आदेश में संशोधन किया। अदालत ने नए आदेश में कहा, इन रिट याचिकाओं के लंबित रहने से ईडी को याचिकाकर्ता सहित किसी भी व्यक्ति को नया समन जारी करने और जांच जारी रखने में बाधा नहीं आएगी।
आईजैक ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि ईडी केआईआईएफबी की गतिविधियों की जांच करने का प्रयास कर रहा है और शीर्ष अदालत ने बार-बार इस तरह की जांच की निंदा की है।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि ईडी के समक्ष पेश होने के लिए उन्हें जारी समन में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों के उल्लंघन की प्रकृति का खुलासा नहीं किया गया है और न ही यह बताया गया है कि किस जांच के बारे में उनसे जवाब मांगा गया है।
ईडी ने पिछले साल जुलाई में उन्हें नोटिस जारी कर पेश होने को कहा था। हालांकि, वह जांच एजेंसी के समक्ष यह कहते हुए पेश नहीं हुए कि उन्हें तिरुवनंतपुरम में पार्टी द्वारा संचालित एक संस्थान में कार्यक्रम में भाग लेना है।
तब आईजैक ने ईडी के नोटिस को केंद्र की भाजपा सरकार का राजनीतिक कदम करार दिया था और आरोप लगाया था कि वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए सभी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।