फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnataka: कर्नाटक में कब आएगी जातीय गणना रिपोर्ट? सिद्धारमैया ने बताया; शराब के लिए नए लाइसेंस पर यह बोले

Sat, 07 Oct 2023 06:23 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु

सार

सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों और एक समान समाज के निर्माण के लिए, विभिन्न समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थितियों के बारे में जानकारी जरूरी है।
विज्ञापन
सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार में नीतीश सरकार द्वारा जाति जनगणना के आंकड़ों को सार्वजनिक करने के बाद से ही कर्नाटक में भी जाति जनगणना के के आंकड़ों पर बात शुरू हो गई है। हाल ही में कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार से मांग की थी कि जातिगत जनगणना के आंकड़े और लगभग पांच साल पहले तैयार हुई रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। वहीं, अब राज्य के सीएम सिद्धारमैया ने इसे लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगले महीने यानी नवंबर में पैनल से रिपोर्ट मिलने के बाद जाति जनगणना रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर फैसला करेंगे। 

विज्ञापन


सीएम सिद्धारमैया ने दिया ये बयान
सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि जब कंथाराज की अध्यक्षता वाले आयोग ने रिपोर्ट दी, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इसे स्वीकार नहीं किया था। अब आयोग के लिए एक अलग अध्यक्ष है। मैंने उनसे कंथाराज द्वारा दायर रिपोर्ट को ज्यों का त्यों प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इस पर उन्होंने कहा है कि रिपोर्ट नवंबर में दी जाएगी। नवंबर में रिपोर्ट मिलने के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों और एक समान समाज के निर्माण के लिए, विभिन्न समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थितियों के बारे में जानकारी जरूरी है। हमारा समाज कुल मिलाकर जाति व्यवस्था वाला है। असमानताओं से छुटकारा पाने और सभी को मुख्यधारा में लाने के लिए हमारे पास आंकड़े होने चाहिए। इस दौरान उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि राज्य सरकार शराब की दुकानें खोलने के लिए कोई नया लाइसेंस नहीं देगी। 
विज्ञापन


इससे पहले, हाल ही में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के. जयप्रकाश ने जाति जनगणना रिपोर्ट को लेकर बड़ा अपडेट दिया था। उन्होंने कहा था कि वह नवंबर में राज्य सरकार को जाति जनगणना रिपोर्ट सौंपेंगे।

2015 में हुआ था सर्वेक्षण
बता दें कि साल 2015 में तत्कालीन सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने राज्य में 170 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण शुरू किया था। इसके आंकड़े अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। कर्नाटक स्टेट बैकवर्ड क्लासेज कमीशन (KSBCC) ने तत्कालीन अध्यक्ष एच कंथाराज की अध्यक्षता में जाति आधारित जनगणना कराई थी। कंथाराज कमीशन की तरफ से बाद में जनगणना की रिपोर्ट सरकार के पास जमा कराई गई।  2018 के बाद बनी कांग्रेस और जनता दल सेकुलर (जेडीएस) की सरकार में जब एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री थे तो उनके पास भी कंथाराज आयोग की रिपोर्ट जमा थी। वहीं, कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिरने के बाद जब भाजपा के बीएस येदियुरप्पा और उनके बाद बसवराज बोम्मई मुख्यमंत्री बने, तब भी जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट सरकार के पास थी। हालांकि किसी सरकार ने इसे जारी करने की जहमत नहीं उठाई। 

विश्लेषकों का है ये दावा
इस बारे में विश्लेषकों का कहना है कि सरकारें इसे जारी करने से कतराती रही हैं क्योंकि सर्वेक्षण के निष्कर्ष कथित तौर पर कर्नाटक में विभिन्न जातियों, विशेष रूप से प्रमुख लिंगायत और वोक्कालिगाओं की संख्यात्मक ताकत की 'पारंपरिक धारणा' से उलट हैं। इस कारण यह एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें