प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस्राइल में आतंकी हमलों की वारदात से उन्हें गहरा आघात लगा है। पीएम मोदी ने कहा कि गंभीर संकट के दौर में भारत इस्राइल की जनता के साथ खड़ा है। उन्होंने पीड़ितों और प्रभावित परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए कहा, इस्राइल में गंभीर मानवीय संकट के इस समय में भारत उनके साथ खड़ा है।
पीएम मोदी हमास का नाम लिए बिना बोले- इस्राइल पर आतंकी हमला
भारत इस्राइल और भारत फिलिस्तीन संबंधों के बीच प्रधानमंत्री मोदी का बयान कई मायनों में अहम है। दरअसल, भारत फिलिस्तीन के साथ भी काफी गहरे संबंध साझा करता है। हमास के कब्जे वाली विवादित धरती से इस्राइल पर हुए रॉकेट हमलों के मामले में पीएम मोदी ने हमास का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने इसे 'आतंकी हमला' जरूर करार दिया।
प्रधानमंत्री का बयान, केवल छह मिनट बाद इस्राइल ने कहा- शुक्रिया
खास बात ये की प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया के कुछ ही मिनट बाद इस्राइल के राजदूत ने पीएम मोदी का आभार प्रकट किया। राजदूत नाओर गिलोन ने कहा कि भारत का नैतिक समर्थन काफी अहम है। उन्होंने कहा कि इस्राइल इस संकट से जरूर बाहर निकलेगा। पीएम मोदी का बयान शनिवार शाम 4.44 बजे आया, इसके सिर्फ 6 मिनट बाद नाओर गिलोन ने शाम करीब 4.50 बजे ट्वीट किया।
भारत से मिले हजारों संदेश, इस्राइल ने जताया आभार
इस्राइल के महावाणिज्य दूत ने हमास के अंधाधुंध रॉकेट हमलों के बाद कहा, प्रधानमंत्री मोदी विश्व के नेता हैं, संकट के इस समय में भारत से इस्राइल को हजारों संदेश मिले हैं। इस्राइल के महावाणिज्य दूत कोबी शोशानी भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में हैं। उन्होंने भारत के रुख पर कहा, ''मैं उन हजारों संदेशों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जो मुझे सुबह से भारत के लोगों से मिल रहे हैं, वे इस तरह से इस्राइल राज्य का समर्थन कर रहे हैं जिससे मेरा दिल खुश हो गया है।''
संप्रभुता पर हमला किसी सूरत में स्वीकार नहीं
कोबी शोशानी ने कहा, इस्राइल की जनता का दिन आज बहुत दुखद रहा है। आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध में भारत सरकार का रुख महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक नेता हैं। देश के रूप में भारत बहुत महत्वपूर्ण है। एक मित्र और एक भाई के रूप में...इस्राइल की संप्रभुता पर हमला किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।
इस्राइल के अलावा फिलिस्तीन भारत का संबंध भी अहम
हिंसक संघर्ष के बीच जानना काफी रोचक है कि फिलिस्तीन और भारत के रिश्ते का इतिहास क्या है? दरअसल, फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के नेता यासेर अराफात और भारत के बीच गहरी दोस्ती थी। मौजूदा दौर में फिलिस्तीन में हमास का दबदबा है।
फिलिस्तीन को भारत का समर्थन
1948 में इस्राइल के गठन के बाद फिलिस्तीनी मुद्दे के लिए भारत का समर्थन आजादी के बाद के शुरुआती वर्षों में देश की विदेश नीति का एक अभिन्न अंग था। फिलिस्तीनी स्वतंत्र देश है, इस मांग का समर्थन करने वाले प्रमुख गैर-अरब, गैर-मुस्लिम देशों में से भारत भी एक था। उन शुरुआती वर्षों में जब एशिया और अफ्रीका के देशों में औपनिवेशिक शासन का अस्त हुआ, फिलिस्तीन की जनता आशा से भरी दुनिया की ओर देख रही थी। भारत के साथ कई देश फिलिस्तीन का मजबूती से समर्थन कर रहे थे।
फिलिस्तीन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन घटा
फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के नेता यासेर अराफात भारत के बहुत अच्छे दोस्त थे। अराफात का दौर समाप्त होने के बाद फिलिस्तीन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन काफी कम हो गया। अराफात के बाद के वर्षों में हमास की जड़ें तेजी से मजबूत हुई। जनवरी 2006 में हुए फिलिस्तीन के आम चुनाव में हमास को बड़ी जीत मिली।
17 साल बाद भी नहीं पटी खाई
हार स्वीकार न करने और जनता के कथित तौर पर लोकप्रिय फैसले को स्वीकार करने से इनकार करने के कारण अराफात और हमास के बीच ऐसी खाई बनी जो 17 साल के बाद भी पाटी नहीं जा सकी है। जून 2007 में टकराव चरम सीमा पर पहुंच गया, जब हमास ने सैन्य रणनीति के लिहाज से अहम केंद्र- गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया। उस समय से ही फिलिस्तीनी क्षेत्र हमास-शासित गाजा पट्टी और फिलिस्तीन राष्ट्रीय प्राधिकरण (पीएनए)-नियंत्रित वेस्ट बैंक के बीच बंटा हुआ है।
हमास की ताकत के कारण कमजोर दिख रहे दोस्त
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास, फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) और फिलिस्तीन नेशनल अथॉरिटी (पीएनए) उदारवादी हैं। दशकों से भारत के साथ दोस्ती भी रही है, लेकिन फिलिस्तीनी राजनीति में आज हमास सबसे प्रभावी खिलाड़ी नजर आता है। ऐसा लगता है कि हिंसा और ताकत के इस्तेमाल के कारण हमास भारत समेत फिलिस्तीन के सभी दोस्तों पर भारी पड़ रहा है। रॉकेट हमलों के बाद इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सख्ती से हमास के खात्मे का संकल्प दिखाया है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में इस्राइल, गाजा पट्टी और फिलिस्तीन की धरती पर रक्तपात जारी रहेगा।