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Kapil Sibal: 'धनखड़ जी, देखिए इसमें बंगाल क्यों नहीं? दुष्कर्म के आंकड़ों पर सिब्बल का उपराष्ट्रपति पर पलटवार

Mon, 02 Sep 2024 04:51 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Kapil Sibal: वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलों को लेकर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर पलटवार किया। उन्होंने 2017 से 2022 के बीच के आंकड़ों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति से पूछा कि इसमें बंगाल क्यों नहीं है?
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Kapil Sibbal - फोटो : ANI
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विस्तार
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राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़ों का हवाला देते हुए सोमवार को उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर पलटवार किया। दरअसल, सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के एक कथित प्रस्ताव में कोलकाता में एक प्रशिक्षु डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले को एक आम घटना करार दिया। जिसके बाद इस बयान की धनखड़ ने आलोचना की थी। 

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सिब्बल ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए 'एक्स' पर लिखा कि 2017 से 2022 के बीच भारत में दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के 1,551 मामले सामने आए। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 280 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 207, असम में 205, महाराष्ट्र में 155 और कर्नाटक में 79 मामले दर्ज किए गए। धनखड़ी जी.. ये देखिए इसमें बंगाल क्यों नहीं है? क्या वहां कोई समस्या नहीं थी?

उप राष्ट्रपति धनखड़ ने एक कथित प्रस्ताव में यह कहने के लिए एससीबीए के अध्यक्ष कपिल सिब्बल की आलोचना की थी कि कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में दुखद घटना अस्वस्थता का लक्षण थी। प्रस्ताव में इसे कथित तौर पर आम घटना बताया गया। 
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इसके बाद उप राष्ट्रपति ने 30 अगस्त को दिल्ली विश्वविद्यालय के भारती कॉलेज के एक कार्यक्रम के दौरान सिब्बल पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, मैं स्तब्ध और दुखी हूं और कुछ हद तक हैरान हूं कि सुप्रीम कोर्ट बार में एक पद पर बैठा व्यक्ति, एक संसद सदस्य, इस तरीके से काम कर रहा है और वह क्या कहता है? उन्होंने इसे (महिला डॉक्टर से दुष्कर्म की घटना) लक्षणों वाली बीमारी बताया और सुझाव दिया कि ऐसी घटनाएं आम हैं? ये क्या बात है? शर्म की बात है। इस तरह के रवैये की निंदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। यह उच्च पद के साथ सबसे बड़ा अन्याय है। 

धनखड़ ने शनिवार को देहरादून में इस बयान पर अफसोस जताते हुए कहा कि इस तरह के बयान हमारे असहनीय दर्द को बढ़ाते हैं और हमारे घावों पर नमक छिड़ते हैं। 

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