कमलनाथ पांच दशक पुराने कांग्रेसी नेता हैं। कांग्रेस पार्टी को छोड़कर कई कद्दावर नेताओं ने भाजपा का दामन थामा है, लेकिन कमलनाथ उन कांग्रेसी नेताओं में से हैं, जो हमेशा ही गांधी परिवार के सबसे वफादार नेताओं में रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के तीसरे पुत्र कमलनाथ को तीसरा पुत्र बताया करती थीं। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी और कांग्रेस नेता स्व. संजय गांधी के बेहद करीबी रहे कमलनाथ यदि भाजपा में शामिल हो जाते हैं, तो ऐसे में ये कांग्रेस के लिए बड़ा झटका कहलाएगा।
कमलनाथ से हुई है मेरी बातः दिग्विजय सिंह
इस बीच मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ के भाजपा में जाने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मीडिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आप लोग जब तक सनसनीखेज खबरें नहीं देंगे, कौन देखेगा। दिग्विजय सिंह ने कहा, उनकी कल रात कमलनाथ से बात हुई थी। वे छिंदवाड़ा में हैं और जिस व्यक्ति ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत नेहरू-गांधी परिवार के साथ की हो, उस आदमी से आप उम्मीद कर सकते हैं कि वो कांग्रेस को छोड़कर जाएगा? दिग्विजय सिंह ने कहा कि कमलनाथ नेहरू-गांधी के परिवार के साथ उस समय खड़े थे, जब पूरी तत्कालीन जनता पार्टी और केंद्र की सरकार इंदिरा गांधी को जेल भेज रही थी। दरअसल, कमलनाथ के भाजपा में जाने की अटकलों को तब बल मिला, जब उन्होंने छिंदवाड़ा में अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए। शनिवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं। छिंदवाड़ा में कमलनाथ का 14 फरवरी से 18 फरवरी तक का कार्यक्रम था। लेकिन कार्यक्रम को छोड़कर अचानक दिल्ली जाने के फैसले ने सियासी माहौल को गरमा दिया है।
इन कारणों से हुआ कांग्रेस से मोहभंग
वरिष्ठ पत्रकार ऋषि पांडेय अमर उजाला से चर्चा में कहते हैं कि कमलनाथ या नकुलनाथ का कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होना कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। क्योंकि अब तक कमलनाथ और कांग्रेस मध्यप्रदेश में एक दूसरे का पर्याय थे। विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद कमलनाथ की पार्टी में पूछ खत्म हो गई थी। बावजूद इसके वे प्रदेश अध्यक्ष पद की कुर्सी पर बने रहना चाहते थे। जब वे विदेश में थे, तब उनसे सलाह लिए बगैर ही पार्टी आलाकमान ने जीतू पटवारी को अध्यक्ष बना दिया। इससे भी वे नाराज चल रहे थे। चुनाव में मिली हार के बाद प्रदेश के सियासी गलियारों में राहुल गांधी के साथ कमलनाथ का तालमेल नहीं बैठना भी सुर्खियों में था। इसी बीच कमलनाथ ने राज्यसभा सीट के लिए सोनिया गांधी से भी मुलाकात की थी, लेकिन पार्टी ने अशोक सिंह को वहां से अपना उम्मीदवार बना दिया। इसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि कमलनाथ और कांग्रेस आलाकमान के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है। 2020 में प्रदेश की कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद कमलनाथ कई मुद्दों पर भाजपा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की आलोचना करते थे। अब वही कमलनाथ सिंधिया के रास्ते पर चल रहे हैं। जिस पार्टी और जिस व्यक्ति के खिलाफ कमलनाथ ने पूरा चुनाव लड़ा, अपना तन-मन और धन लगाया। अब कमलनाथ खुद वहां जा रहे हैं।
सिंधिया के साथ संबंध हुए थे खराब, तो गंवा दी थी सीएम की कुर्सी
कमलनाथ 2018 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उस समय सिंधिया और कमलनाथ दोनों ही कांग्रेस में थे और दोनों ने मिलकर बड़े पैमाने पर चुनावी अभियान चलाया और भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर दोनों के बीच खटास पैदा हो गई थी, क्योंकि राहुल गांधी ने कमलनाथ को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया था, लेकिन इसके बाद भी सिंधिया गुट के विधायकों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था, लेकिन सरकार चलाने के तौर-तरीकों को लेकर कमलनाथ और सिंधिया के बीच मन मुटाव हुआ और सिंधिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए और उन्होंने अपने समर्थक विधायकों की मदद से कमलनाथ की सरकार गिरा दी थी।