सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कुछ जजों को अतिरिक्त जिला जज बनने के लिए विभागीय परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं देने के आदेश में सुधार की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान एक न्यायिक अधिकारी की उपस्थित को देखते हुए कहा कि यह वाकई दुखद है। सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कुछ जजों को अतिरिक्त जिला जज बनने के लिए विभागीय परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं देने के आदेश में सुधार की मांग की गई है। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने दिल्ली के एक न्यायिक अधिकारी से पूछा, आप यहां क्या कर रहे हैं? कोर्ट किस वक्त शुरू हुआ। इस पर न्यायिक अधिकारी ने तपाक से कहा सुबह 10 बजे।
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पीठ ने कहा अभी 10 बज कर 50 मिनट हो रहे हैं, आप यहां क्या कर रहे हैं। आपको तो अपने कोर्ट में होना चाहिए था। जज ने कहा कि वह कुछ घंटों के लिए छुट्टी पर हैं और तुरंत कोर्टरूम से जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि न्यायिक अधिकारी को इस पर भी कोई पश्चाताप नहीं है और उसने कहा, आपके मामले को एक सक्षम वकील देख रहे हैं। फिर भी आप यहां हैं। यह सिस्टम के लिए शुभ नहीं है। यह वाकई दुखद है। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि जिला जज की एक सीमित प्रतिस्पर्धी परीक्षा में एक सिविल जज को कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए।