जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में अवैध पुलों और दीवारों सहित विभिन्न निर्माण कार्यों के आरोपों की जांच के निर्देश दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को दिए हैं। यह निर्देश एक अधिवक्ता की याचिका पर दिए गए, जिसमें पार्क में अवैध निर्माण के आरोप लगाए गए थे। साथ ही बताया कि एनटीसी से की गई शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, केवल स्थिति रिपोर्ट मंगवा ली गई।
याचिकाकर्ता व अधिवक्ता गौरव कुमार ने अदालत को बताया कि एनटीसीए को इन अवैध निर्माण पर कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन वह केवल उत्तराखंड सरकार को मामला भेज रहा है। उसे खुद इन आरोपों की जांच करनी चाहिए, इसके लिए निरीक्षण टीम भेजनी चाहिए। जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह ने कहा कि याचिका में जो आरोप लगे और तथ्य सामने आए, इनकी तत्काल जांच करवाई जाए।
यह आरोप थे
- बाघों के प्रजनन क्षेत्र नष्ट किए जा रहे हैं।
- जैव विविधता, वनस्पति व जीवों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
- पार्क में पुल या दीवारें बनाने के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत एनटीसीए से अनुमति नहीं ली गई।
- एनटीसीए ने उत्तराखंड के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को पत्र लिख रिपोर्ट देने को कहा। जबकि उनकी अनुमति बिना निर्माण हो ही नहीं सकते।