एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतरिक्ष एजेंसी ने मिनी रॉकेट को उद्योग में हस्तांतरित करने के लिए बोली का रास्ता चुनने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, हम एसएसएलवी को पूरी तरह से निजी क्षेत्र को ट्रांसफर कर देंगे। पिछले साल अगस्त में एसएसएलवी की पहली उड़ान दूसरे चरण के पृथक्करण के दौरान 'इक्विपमेंट बे डेक' पर थोड़े समय के लिए कंपन गड़बड़ी के कारण विफल रही थी।
इसरो ने इस गड़बड़ी का गहन विश्लेषण किया और सुधारात्मक कदम उठाए और फिर फरवरी में एसएसएलवी का सफल प्रक्षेपण किया। एसएसएलवी ने इसरो के ईओएस-07, अमेरिकी कंपनी एंटारिस के जेनस-1 और चेन्नई स्थित अंतरिक्ष स्टार्ट-अप 'स्पेस किड्ज' ks आजादी सैट-2 सैटेलाइट्स को 450 किलोमीटर के सर्कुलर ऑर्बिट में स्थापित किया।
एसएसएलवी जैसे छोटे रॉकेट, नैनो और माइक्रो-सैटेलाइट को लक्षित करते हैं, जिनका वजन क्रमशः 10 किलोग्राम और 100 किलोग्राम से कम होता है, और ऑन-डिमांड लॉन्च सेवाएं प्रदान करते हैं।
पिछले साल इसरो ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और लार्सन एंड टुब्रो के कंसोर्टियम को पांच ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) बनाने का ठेका दिया था। इंडियन स्पेस एसोसिएशन और कंसल्टेंसी फर्म ईवाई इंडिया द्वारा तैयार एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च करने की सेवाओं से भारत का घरेलू अंतरिक्ष उद्योग 2025 तक अर्थव्यवस्था में 13 अरब डॉलर का योगदान दे सकता है।
एसएलवी-3, एएसएलवी, पीएसएलवी, जीएसएलवी और मार्क-3 (एलवीएम-3) के बाद एसएसएलवी इसरो द्वारा विकसित छठा लॉन्च व्हीकल था। एसएलवी -3 और एएसएलवी को अब सेवानिवृत्त कर दिया गया है।