अगले पांच दिनों तक पूर्वी भारत के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को इसकी पुष्टि की है। विभाग के अनुसार पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों में इस महीने दूसरी बार लू चल रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, ओडिशा में 15 अप्रैल से और पश्चिम बंगाल में गंगा के किनारे वाले इलाकों में 17 अप्रैल से लू की स्थिति बनी हुई है। एमडी ने एक बयान में कहा कि अगले पांच दिनों के दौरान पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और झारखंड के कुछ हिस्सों में लू की गंभीर स्थिति की आशंका है।
मौसम विभाग ने कहा कि नमी बढ़ने से तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक, गोवा, केरल, पश्चिम बंगाल और बिहार के लोगों को असुविधा हो सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 22 अप्रैल और 23 अप्रैल को रात का तापमान काफी अधिक रहने की आशंका है। रात के उच्च तापमान को खतरनाक माना जाता है क्योंकि शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता है। शहरों में यह स्थिति और अधिक दिखती है।
मौसम विभाग के अनुसार, लू की स्थिति तब बनती है जब अधिकतम तापमान मैदानी इलाकों में कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस, तटीय क्षेत्रों में 37 डिग्री और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री तक पहुंच जाता है या सामान्य से तापमान कम से कम 4.5 डिग्री अधिक हो जाता है। सामान्य तापमान से 6.4 डिग्री से अधिक होने पर भीषण लू की स्थिति बन जाती है।
आईएमडी ने कमजोर अल नीनो की स्थिति के कारण अप्रैल-जून की अवधि के दौरान अत्यधिक गर्मी की चेतावनी दी थी। इसी अवधि में सात चरण के लोकसभा चुनावों के दौरान लगभग एक अरब लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग करना है, ऐसे में भीषण गर्मी पड़ने से चिंताएं बढ़ गई हैं। पहले चरण के चुनाव के लिए मतदान 19 अप्रैल को हुआ था। दूसरे चरण का मतदान 26 अप्रैल को होना है।
मौसम विभाग ने कहा है कि अप्रैल में देश के विभिन्न हिस्सों में लू के चार से आठ दिन होने की आशंका है, जबकि सामान्य रूप से यह स्थिति एक से तीन दिन तक रहती है। पूरे अप्रैल-जून की अवधि में सामान्य चार से आठ दिनों के मुकाबले दस से 20 दिनों तक हीटवेव वाले दिन होने की आशंका है।
मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, विदर्भ, मराठवाड़ा, बिहार और झारखंड में लू के दिनों की अधिक संख्या का रह सकती है। कुछ स्थानों पर 20 से भी अधिक दिनों तक हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। गर्मी बढ़ने से बिजली ग्रिड पर भी दबाब बढ़ सकता है, जिस कारण इससे जुड़ी समस्याएं भी पैदा हो सकती है।
अल नीनो की स्थिति क्या है?
मध्य प्रशांत महासागर में सतह के पानी गर्मी – भारत में कमजोर मानसूनी हवाओं और शुष्क वातावरण का कारण बनता है। इसे ही अल नीनो की स्थिति कहते हैं।
ला नीना की स्थिति क्या है?
अल नीनो के विपरीत ला नीना मानसून के दौरान भरपूर वर्षा का कारण बनती है। अप्रैल के मध्य में जारी अपडेट में आईएमडी ने कहा कि भारत में 2024 के मानसून सीजन में सामान्य से अधिक बारिश होगी, जिसमें अगस्त-सितंबर तक ला नीना की स्थिति बनने की उम्मीद है। भारत के कृषि परिदृश्य के लिए मानसून महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की खेती वाले क्षेत्र का 52 प्रतिशत इस पर निर्भर है। यह देश भर में बिजली उत्पादन के अलावा पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को फिर से भरने के लिए भी महत्वपूर्ण है।