भारतीयों की नेतृत्व क्षमता धीरे-धीरे पूरे विश्व में छा रही है। विश्व के 15 देशों में भारतीय मूल के लोग प्रमुख लीडरों के रूप में जगह बना चुके हैं। इनमें अमेरिका, यूनाटेड किंगडम जैसी महाशक्तियां भी शामिल हैं। भारतीय समुदाय के साथ काम करने वाले अमेरिकी संस्था इंडियाजपोरा ने भारतीय लीडर्स की सूची जारी की है। इन देशों में भारतीय भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऐसी विरासत तैयार कर रहे हैं, जो हमेशा काम आएगी।
यह सूची विभिन्न देशों की सरकारी वेबसाइटों व सार्वजनिक जानकारियों व स्रोतों से तैयार की गई है। इन 15 देशों में 200 भारतीय मूल के नागरिक अपने नेतृत्व क्षमता और जनसेवा के बल पर ऊंचे पायदानों तक पहुंच चुके हैं। 60 नागरिकों ने तो कैबिनेट स्तर का पद हासिल किया हुआ है। संगठन के संस्थापक एमआर रंगास्वामी ने कमला हैरिस का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका में पहली महिला एवं अश्वेत उपराष्ट्रपति भी भारतीय समुदाय से ताल्लुक रखती है, यह बेहद खास बात है।
सूची में शामिल अमेरिकी सांसद अमरीश बाबूलाल ‘अमी’ बेरा विदेश मामलात एशिया सबकमेटी के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा, सूची में शामिल होना गर्व की बात है। फिजी की शिक्षामंत्री रोजी अकबर के अनुसार, भारतीयों ने इन देशों के विकास में अहम योगदान दिए हैं, इसलिए वे महत्वपूर्ण ओहदों पर पहुंच रहे हैं। कनाडा की सांसद रत्ना ओमिद्वार कनाडाई होते हुए अपनी भारतीय विरासत को गर्व करने वाला बताती हैं। एजेंसी
इन ओहदों पर भारतीय
किसी देश का नेतृत्व करने वालों में कैबिनेट मंत्री, सांसद, कूटनीतिज्ञ, केंद्रीय बैंकों के प्रमुख अधिकारी, वरिष्ठ नौकरशाह, आदि को गिना जाता है। भारतीय इन पदों पर पहुंच कर अपना और अपने समुदाय का सिर गर्व से ऊंचा कर रहे हैं।
इन प्रमुख देशों में प्रभाव
बीती सदियों में हुए पलायन की वजह से भारतीय जनसमुदाय अमेरिका और यूके साथ साथ कनाडा, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, यूएई शामिल हैं। वहीं आधुनिक समय में भी प्रतिष्ठित पेशेवर इन देशों के नागरिक बन रहे हैं।
3.2 करोड़ भारतीय, 58.7 करोड़ के लीडर, 203 करोड़ की जीडीपी पर नियंत्रण
- भारत के विदेश मामलात मंत्रालय के अनुसार विश्व बाकी देशों में 3.20 करोड़ भारतीय मूल के लोग (पीआईओ) रह रहे हैं।
- सूची में शामिल लीडरों के पास 58.7 करोड़ लोगों का नेतृत्व है।
- वे जिन देशों से हैं, उनकी कुल जीडीपी 203.5 लाख करोड़ रुपये की है।