सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा अच्छे बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पर्यावरण-केंद्रित नजरिया अपनाने वाला भारत दुनिया का पहला देश है। बता दें कि, एनजीटी की तरफ से विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में जज नरसिम्हा ने ये टिप्पणी की है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने रविवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में भारत पहला देश है, जिसने मानव-केंद्रित (एंथ्रोपोसेन्ट्रिक) सोच से हटकर पर्यावरण-केंद्रित (इको-सेंट्रिक) दृष्टिकोण अपनाया। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा विज्ञान भवन में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की तरफ से आयोजित दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एनवायरनमेंट-2025 के समापन सत्र में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि थे।
क्या है यह बदलाव?
मानव-केंद्रित सोच में पर्यावरण को सिर्फ मनुष्यों की जरूरतों के हिसाब से देखा जाता है, जबकि पर्यावरण-केंद्रित सोच प्रकृति को खुद के लिए मूल्यवान मानती है, न कि सिर्फ इंसानों के उपयोग के लिए। न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से ही पर्यावरण को जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानती रही है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार उनकी इस दलील को स्वीकार किया कि पर्यावरण को केवल मानव-हित के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
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उन्होंने कहा, 'अगर हम अपनी जड़ों की ओर लौटें और हमारे पारंपरिक सरल उपायों को अपनाएं, तो पश्चिमी दुनिया द्वारा पर्यावरण पर थोपे गए विचारों से बाहर निकलकर अपने मौलिक और व्यावहारिक विचारों से धरती को उसकी प्राकृतिक अवस्था में बहाल कर सकते हैं।'
सरकार और न्यायपालिका की भूमिका
इस कार्यक्रम में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार पर्यावरण से जुड़े गंभीर मुद्दों को हल करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, 'अगर हम अभी कदम उठाएं, तो प्रकृति के संतुलन को बहाल कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।' एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि इस सम्मेलन में वायु, जल, वन और पर्यावरण के संरक्षण के सामूहिक प्रयासों पर गहन चर्चा हुई। इस सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को किया था।