1000 घंटे से अधिक की उड़ानें
चाहे युद्ध के मैदान की बात हो, या फिर हो रेस्क्यू ऑपरेशन, भारतीय वायु सेना हमेशा एक कदम आगे रही है। 18वें लोकसभा चुनाव में भी भारतीय वायु सेना ने अपनी अहम भूमिका निभाई है। लोकसभा चुनावों के दौरान भारतीय वायुसेना ने सात चरणों में से पांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दौरान वायु सेना ने 1750 से अधिक सॉर्टी के दौरान 1000 घंटे से अधिक की उड़ानें भरीं। वायुसेना ने इस टॉस्क को नोडल अधिकारियों के माध्यम से विभिन्न राज्यों के निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्तों के साथ क्लोज कॉर्डिनेशन के जरिए पूरा किया। चुनावों के दौरान भारतीय सेना और बीएसएफ के हेलीकॉप्टरों को भी शामिल किया गया था।
महीनों पहले शुरू हो जाती है तैयारी
एयर वाइस मार्शल पद से रिटायर हो चुके मनमोहन बहादुर कहते हैं कि कोई भी चुनाव भारतीय वायुसेना के बिना पूरा होना संभव नहीं है। वह बताते हैं कि चुनाव शुरू होने से महीनों पहले ही निर्वाचन आयोग ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर्स की व्यवस्था के लिए एयर हेडक्वॉर्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ के साथ मीटिंग करता है। उन्होंने कहा कि वह भी 2009 में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर काम कर चुके हैं और इस भूमिका को निभा चुके हैं। उनके अनुसार, हैवी एयरक्राफ्ट जैसे सी-17, आईएल-76 के अलावा एमआई-17, एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव और चीता-चेतक जैसे हेलीकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जाता है। वहीं अगर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति आती है या पोलिंग पार्टी में किसी की तबीयत खराब होती है और उसका तुरंत रिप्लेसमेंट चाहिए, तो एयरफोर्स ही मदद करती है। वहीं चुनाव खत्म होने के बाद सुरक्षा बलों को सुरक्षित पहुंचाना भी उनकी ही जिम्मेदारी होती है।
ईवीएम की एयरलिफ्टिंग में वायुसेना का अहम रोल
एयरफोर्स सूत्रों के मुताबिक लोकसभा-2024 के दौरान भारतीय वायुसेना के मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टरों एमआई-17 वैरिएंट, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों चेतक और स्वदेशी रूप से निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टरों (एएलएच) ध्रुव का इस्तेमाल पोलिंग पार्टियों लाने-ले जाने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की एयरलिफ्टिंग के लिए इस्तेमाल किया गया। सूत्र बताते हैं कि आम चुनाव 2024 के दौरान, भारतीय वायुसेना ने देश के दूरदराज के उन क्षेत्रों में भारत निर्वाचन आयोग की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां सुरक्षा के चलते सड़क मार्ग से आवाजाही करना सुरक्षित नहीं था।
हिंसा ग्रस्त इलाकों में भी पहुंचती है वायुसेना
एयर वाइस मार्शल बहादुर कहते हैं, चुनाव आयोग के मुताबिक इस साल पहले चरण में ही भारतीय वायुसेना ने 439 सॉर्टी कीं, जिनमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में रहीं। जहां 850 पोलिंग अफसरों को नक्सल इलाकों में बने 206 पोलिंग बूथों तक पहुंचाया और लाया गया। वहीं, छत्तीसगढ़ के नक्सली हिंसा से प्रभावित बस्तर इलाके में 156 पोलिंग स्टेशंस पर 1000 कर्मियों की तैनाती की गई थी। वह कहते हैं, दुर्गम स्थानों तक भारतीय वायुसेना की मदद से ही पहुंचा जा सकता है। वह कहते हैं कि कभी ये आपने सुना है कि 14,000 फीट पर लद्दाख की पहाड़ियों में दुर्गम जगह पर बने पोलिंग बूथ पर कोई पोलिंग पार्टी नहीं पहुंची, इसलिए मतदान नहीं हो पाया। नहीं सुना होगा, क्योंकि हमारे लिए ड्यूटी सबसे पहले है।