चीन की बढ़ती समुद्री ताकत के बीच भारतीय नौ सेना भी अपनी क्षमता बढ़ाने जा रही है। उम्मीद है कि इसी महीने भारतीय नौ सेना के बेड़े में जंगी जहाज आईएनएस विशाखापट्टनम पूरी तरह शामिल हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो यह जहाज 18 नवंबर तक कमीशन होने की पूरी उम्मीद है। नौ सेना ने इस बारे में ट्वीट करते हुए जानकारी दी है कि भारत ने 28 अक्तूबर को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स से पहला स्वदेशी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर पोत 'पी13बी' प्राप्त कर लिया है। इसे नौ सेना में आईएनएस विशाखापत्तनम के नाम से जाना जाएगा।
इसी के साथ उम्मीद की जा रही है कि आईएनएस वेला को भी इसी महीने के अंत तक नौ सेना में कमीशन कर लिया जाएगा। इन दोनों जहाजों का निर्मात मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स द्वारा किया गया है। हालांकि, आईएनएस वेला को डिजाइन फ्रांसीसी नौसैनिक समूह ने किया है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में और बढ़ेगी भारत की ताकत
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की निगरानी के लिए भारत 2022 तक अपनी ताकत और बढ़ाएगा। आईएनएस विशाखापट्टनम के अलावा आईएनएस मोरमुगाओ, इंफाल ओर पोरबंदर को भी 2022 तक सेना में शामिल करने की तैयारी है। ये सभी जंगी जहाज मिसाइल हमले करने में सक्षम होंगे।
कितना ताकतवर है आईएनएस विशाखापट्टनम
स्वदेशी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर विमानरोधी मिसाइलों को दाग सकता है। इस जंगी जहाज में सुपरसोनिक एंटी शिप व लैंड अटैक 18 ब्रह्मोस मिसाइल लगाई जा सकती हैं। इसके अलावा जमीन से हवा में मार करने वाली यह 32 बराक मिसाइलों को भी लांच कर सकता है। साथ ही यह कई तरह के सेंसर पर हथियारों से लैस है। इसके अलावा इस जहाज को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे किसी भी रडार के लिए इनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा यह जहाज US MH 60 R जैसे दो हेलिकॉप्टरों को भी ले जाने में सक्षम है।