रक्षा सूत्रों ने बताया, रक्षा बलों के लिए प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों की दो और इकाइयां अधिग्रहित की जा रही हैं, जो तीनों बलों की संपत्ति सहित एक रॉकेट बल बनाने की दिशा में अपने रास्ते पर हैं। उन्होंने बताया कि जमीनी बलों के लिए इन मिसाइलों की खरीद का प्रस्ताव अतिम चरण में है और जल्द ही इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलें 150 से 500 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य को भेद सकती हैं और इंटरसेप्टर मिसाइलों के जरिए दुश्मन के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल है।
सूत्रों ने बताया कि बलों को मजबूत क्षमता देने के लिए इन मिसाइलों की रेंज को कुछ सौ किलोमीटर और बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। चीन और पाकिस्तान दोनों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो सामरिक भूमिकाओं के लिए हैं। सूत्रों ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित मिसाइल को और विकसित किया जा रहा है।
मिसाइल प्रणाली का विकास 2015 के आसपास शुरू हुआ और इस तरह की क्षमता के विकास को सेना प्रमुख के रूप में दिवंगत जनरल बिपिन रावत ने बढ़ावा दिया। मिसाइल का पिछले साल 21 दिसंबर और 22 दिसंबर 2021 को लगातार दो बार सफल परीक्षण किया गया था।
सतह से सतह पर मार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' को इंटरसेप्टर मिसाइलों को हराने में सक्षम बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह मिडएयर में एक निश्चित सीमा को कवर करने के बाद अपना रास्ता बदलने की क्षमता रखता है। इस मिसाइल को पहले भारतीय वायु सेना में शामिल किया जाएगा और उसके बाद भारतीय सेना द्वारा शामिल किया जाएगा।
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