गश्त के दौरान आने वाली समस्याएं, युद्ध में आपसी सामंजस्य और मुश्किल में फंसे जहाज चालक दल को बचाने के लिए जापान और भारत के तटरक्षको ने संयुक्त अभ्यास किया।
भारत और जापान की तटरक्षकों ने युद्ध में आपसी सामंजस्य और मुश्किल में फंसे जहाज चालक दल को बचाने के लिए एक संयुक्त अभ्यास किया। बंगाल की खाड़ी में 'सहयोग काइजिंन' संयुक्त अभ्यास में उपकरणों से लैस आईसीजीएस शौर्य और जेसीजीएस याशिमा ने एक चालक दल के जहाज को बचाने का अभ्यास किया। जहाज अभ्यास में तेज गश्ती बचाव अभियान शुरू करने के लिए आगे बढ़े। संयुक्त अभ्यास में आईसीजीएस शौनक, आईसीजीएस सुजय और आईसीजीएस समुद्र पहरेदार और दो चेतक हेलीकॉप्टर भी शामिल थे।
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इस दौरान दोनों देशों की तटरक्षकों ने समुद्री गश्त के दौरान आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए संयुक्त अभ्यास किया है। गौरतलब है कि आईसीजीएस शौर्य और जेसीजीएस याशिमा आठ जनवरी से शुरु हुए संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास में शामिल हुए थे। इस दौरान समुद्री प्रदूषण से निपटने के लिए भी प्रशिक्षण दिए गए। संयुक्त अभ्यास की समीक्षा तटरक्षक क्षेत्र (पूर्व) के कमांडर महानिरीक्षक डॉनी माइकल ने की। वहीं कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन युइची मोटोयामा ने द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए आईजी के साथ बैठक की ।
आईजी डॉनी माइकल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मानवीय और पर्यावरणीय से जुड़ी कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित करते हैं। दोनों नौसेना ने एक-दूसरे के साथ अनुभव को साझा किया। कैप्टन युइची मोतोयामा ने कहा कि संयुक्त अभ्यास ने दिखा दिया है कि दोनों देशों के बीच सहयोग मजबूत हुए हैं। मैंने करीब से दोनों देशों की नौसेना के हौसले को करीब से देखा है।