उन्होंने यह भी कहा कि खालिस्तानी आतंकवाद और विदेशी दखल के मुद्दे पर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले भी कई बार बात हुई है। ओटावा हमेशा अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा करेगा और हिंसा को रोकने के लिए हमेशा तत्पर रहेगा। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ लोगों की हरकतें पूरे समुदाय या कनाडा का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं।
ट्रूडो ने कहा कि जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी के साथ चर्चा के दौरान खालिस्तानी आतंकवाद और विदेशी दखल का मुद्दा उठा था। पिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी के साथ हमने इन दोनों मुद्दों पर कई बार बातचीत की है। कनाडा हमेशा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अंतरात्मा की आजादी और शांतिपूर्ण विरोध की स्वतंत्रता का बचाव करेगा।
उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही कहा कि हम हिंसा को रोकने और नफरत को नकारने के लिए हमेशा मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि समुदाय के मुद्दे पर, यह याद रखना जरूरी है कि कुछ लोगों की हरकतें पूरे समुदाय या कनाडा का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं।
उन्होंने आगे कहा, इसका दूसरा पहलू यह है कि हमने कानून के शासन का सम्मान करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला और हमने विदेशी हस्तक्षेप के बारे में भी बात की। कनाडा में अक्सर खालिस्तानियों के प्रदर्शन से लेकर भारत विरोधी पोस्टर लगाए जाने की खबरें आती रहती हैं।
बैठक में पीएम मोदी ने क्या कहा
वहीं, बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात बात पर जोर दिया कि भारत-कनाडा संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन के प्रति सम्मान और लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, उन्होंने कनाडा में चरमपंथी तत्वों की भारत विरोधी गतिविधियों के जारी रहने के बारे में हमारी गहरी चिंताओं से अवगत कराया। वे अलगाववाद को बढ़ावा दे रहे हैं और भारतीय राजनयिकों के खिलाफ हिंसा भड़का रहे हैं, डिप्लोमेटिक परिसरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और कनाडा और उनके पूजा स्थलों में भारतीय समुदाय को धमकी दे रहे हैं।'
बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा कि संगठित अपराध, ड्रग सिंडिकेट और मानव तस्करी के साथ ऐसी ताकतों का गठजोड़ कनाडा के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए। दोनों देशों के लिए ऐसे खतरों से निपटने में सहयोग करना आवश्यक है।